अंबेडकरनगर। जिले की 250 ग्राम पंचायतों की ढाई लाख की आबादी को कई शहरी सुविधाएं मिलने लगी हैं। लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से संबंधित ग्राम पंचायत को मॉडल गांव के रूप में तैयार किया गया है। गांव की गलियां जहां रोशनी से जगमग हैं तो वहीं जल निकासी, पेयजल व आवागमन संबंधित सुविधा बेहतर की गई हैं।
गांवों में रहने वाले लोगों को शहरी क्षेत्र जैसी सुविधाएं प्रदान करने के लिए ग्राम पंचायतों को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। योजना के तहत मॉडल गांव के रूप में चयनित ग्राम पंचायत में प्रकाश, पेयजल, आवागमन व बेहतर साफ-सफाई की व्यवस्था की जा रही है। मालूम हो कि जिले में 200 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2023-21 में 529 ग्राम पंचायतों को मॉडल गांव के रूप में परिवर्तित करने के लिए चयनित किया गया।
डीपीआरओ कार्यालय के अनुसार लगभग 25 करोड़ रुपये से संबंधित गांवों को मॉडल गांव के रूप में संतृप्त कर दिया गया है। योजना के तहत संबंधित गांवों में बेहतर साफ-सफाई के लिए जहां कूड़ा वाहन प्रतिदिन गांव की गलियों में दौड़ रहे हैं तो वहीं गलियों में रोशनी के लिए स्ट्री लाइटें भी लगाई गई हैं। जलभराव की समस्या दूर करने के लिए न सिर्फ नई नालियों का निर्माण किया गया है बल्कि क्षतिग्रस्त नालियों को दुरुस्त भी किया गया है। इसके साथ ही पेयजल व आवागमन व्यवस्था को भी चुस्त-दुरुस्त कर दिया गया।
279 पंचायतों में तेजी से चल रहा काम
स्वच्छ भारत मिशन अभियान के प्रभारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2023-24 में मॉडल गांव के रूप में विकसित करने के लिए चयनित 529 में 250 ग्राम पंचायतें पूरी तरह से मॉडल गांव के रूप में विकसित हो चुकी हैं। इसमें बेलापरसा, मजीसा, कजपुरा, अमोला बुजुर्ग, अटंगी, पेठिया, काही, उतरेथू, लालापुर, मुंडेहरा, मछलीगांव, कन्नूपुर, सिकरोहर, सिकंदरपुर आदि शामिल हैं। बताया कि 279 ग्राम पंचायतों में तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। मार्च के अंत तक सभी शेष बची ग्राम पंचायतों को भी मॉडल गांव के रूप में विकसित कर दिया जाएगा।
31 मार्च तक पूरा होना है काम
279 ग्राम पंचायतें अब तक मॉडल गांव के रूप में विकसित नहीं हो सकी हैं। वहां 31 मार्च तक सभी कार्य पूरा कर लिए जाने के निर्देश जिम्मेदारों को दिए गए हैं। शेष 370 ग्राम पंचायतों को मॉडल गांव के रूप में विकसित करने के लिए सर्वे अंतिम दौर में चल रहा है। - अवनीश श्रीवास्तव, डीपीआरओ