जिला मुख्यालय के फौव्वारा तिराहे व सब्जी मंडी में तो किसी तरह मोबाइल ट्रांसफार्मर लगाकर विद्युत आपूर्ति की जा रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की हालत बदहाल है। जिले में बेपटरी हुई बिजली आपूर्ति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सात दिन में ही 203 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। इससे 5 लाख आबादी प्रभावित चल रही है।
गत जुलाई में 317 ट्रांसफार्मर फुंक गए थे। लगातार फुंकते ट्रांसफार्मरों के चलते न सिर्फ शहरी क्षेत्र वरन ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी मुश्किल में हैं। अवर्षण के बीच बढ़ती उमस व गर्मी से लोग पहले ही परेशान थे अब विद्युत संकट ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
उपभोक्ताओं को सुचारु विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने को लेकर पावर कॉर्पोरेशन दावे तो करता है, लेकिन हकीकत में उसका दावा सच नहीं नजर आ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक जुलाई से 8 अगस्त तक कुल 520 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। औसतन प्रतिदिन 13 ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं।
इनमें कॉर्पोरेशन ने 504 ट्रांसफार्मर ठीक कराकर लगाए जाने का दावा तो किया है पर हकीकत इससे परे है। विभाग के अनुसार 16 ट्रांसफार्मर अभी तक नहीं बदले जा सके हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि विभिन्न क्षमता के 40 से अधिक ट्रांसफार्मर फुंके पड़े हुए हैं।
इन्हें बदले जाने के लिए उपभोक्ता रोजाना चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। कॉर्पोरेशन के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में अलग अलग क्षमता के कुल 317 ट्रांसफार्मर फुंक गए। इनमें से 309 ट्रांसफार्मर ठीक कराकर लगवा दिए गए हैं। अगस्त माह में सात अगस्त तक विभिन्न क्षमता के कुल 203 ट्रांसफार्मर फुंक गए।
उपभोक्ताओं की मानें तो लगने के दो दिन बाद ही ट्रांसफार्मर फुंक जाते हैं। ऐसे में इसकी गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। बीते दिनों जिला मुख्यालय पर फौव्वारा तिराहे के निकट लगा 400 केवी ट्रांसफार्मर फुंक गया था। उसे बदलकर उसके स्थान पर जैसे ही नया ट्रांसफार्मर लगाया गया, वह तत्काल फुंक गया।
इसके बाद आपूर्ति बहाल करने के लिए मोबाइल ट्रांसफार्मर लगाया गया। इसी प्रकार सब्जी मंडी में लगा 250 केवीए का ट्रांसफार्मर भी लगभग एक पखवारे पूर्व फुंक गया था। उपभोक्ताओं की नाराजगी के बाद उसे बदला गया, लेकिन बमुश्किल दो घंटे के बाद वह भी फुंक गया। इस पर उपभोक्ताओं ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
लगातार फुंकते ट्रांसफार्मर को लेकर उपभोक्ताओं ने रिपेयरिंग व्यवस्था पर सवालिया निशान लग रहे हैं। गौहन्ना के रामजियावन व रवि शर्मा ने कहा कि ट्रांसफार्मर की रिपेयरिंग में ही बड़ा खेल खेला जाता है। छोटी कमियों को ठीक कराकर ट्रांसफार्मर लगा दिया जाता है, जो बमुश्किल एक माह भी नहीं चलते।
अकबरपुर के शहाब परवेज व अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि रिपेयर किए गए ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता की जांच की जानी चाहिए। यदि इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाए, तो संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अकबरपुर विद्युत वितरण खण्ड के वर्कशाल स्टोर प्रभारी शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ओवर लोड व जर्जर तारों के चलते ट्रांसफार्मर फुंकते रहते हैं। बताया कि 50 प्रतिशत से अधिक ट्रांसफार्मर ओवरलोड के चलते ही जलते हैं। बताया कि जर्जर तारों के शार्ट करने या फिर टूटने के चलते भी ट्रांसफार्मर फुंक जाते हैं।