इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए द्वितीय किस्त की मांग ही नहीं की गई है। माना जा रहा है कि आधा अधूरा कार्य होने की वजह से उपभोग प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सका है। इनमें से नौ परियोजनाएं सिर्फ विद्यालय की ही हैं। इसके अलावा विद्युत व खड़ंजा निर्माण की भी कई परियोजनाएं शामिल हैं।
विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य के लिए प्रत्येक विधायक को प्रति वर्ष डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि निधि में उपलब्ध कराई जाती है। बीते वर्ष 2014-15 में अकबरपुर विधायक व दुग्ध विकास मंत्री राममूर्ति वर्मा ने क्षेत्र में विकास कार्यों से जुड़ी कुल 88 परियोजनाओं के लिए धनराशि प्रदान की थी।
इनमें से 22 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिन्होंने द्वितीय किस्त की धनराशि की मांग चालू वित्तीय वर्ष के भी चार माह बीतने के बाद भी नहीं की गई है। जिन 22 परियोजनाओं द्वारा प्रथम किस्त के रूप में उपलब्ध धनराशि का उपभोग प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है, उनमें खड़ंजा निर्माण की तीन, विद्युत की सात, हैंडपंप की तीन व विद्यालयों की नौ परियोजनाएं शामिल हैं।
विभाग द्वारा कई बार संबंधित से उपभोग प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाने के लिए पत्र लिखा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। जिन विद्यालयों ने उपभोग प्रमाणपत्र नहीं दिया है।
उनमें सरस्वती विद्यामंदिर नेवतरिया को 2 लाख के सापेक्ष प्रथम किस्त के रूप में एक लाख 20 हजार, संत द्वारिका प्रसाद महाविद्यालय को 2 लाख के सापेक्ष एक लाख 20 हजार, नबी हसन इदरीसी विद्यालय कुर्कीबाजार को 2 लाख के सापेक्ष एक लाख 20 हजार, मदरसा निसारुलउलूम गौहन्ना को 2 लाख के सापेक्ष एक लाख 20 हजार, मदरसा शमसियानूरिया सोनगांव को 2 लाख के सापेक्ष एक लाख 20 हजार, मदरसा तालिमुद्दीन जूनियर हाईस्कूल शहजादपुर को 2 लाख के सापेक्ष एक लाख 20 हजार, मदरसा जामिया मंजूरुलउलूम सैदापुर को 2 लाख के सापेक्ष एक लाख 20 हजार, मदरसा जामिया कादरिया फैजुलउलूम सिकंदरपुर को 2 लाख के सापेक्ष एक लाख 20 हजार व डा. अशोक स्मारक पीजी कालेज अकबरपुर को 2 लाख के सापेक्ष एक लाख 20 हजार रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
उधर परियोजना निदेशक उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि डिमांड प्राप्त होने लगी है। सबकुछ सुचारु ढंग से चल रहा है। कहीं लापरवाही व मनमानी पाई गई, तो उसका संज्ञान लिया जाएगा।