विकास भवन में चल रही मनमानी का प्रमाण देखिए। शनिवार को सुबह साढ़े 10 बजे तक अर्थ संख्या अधिकारी के कार्यालय के 14 में से आठ कर्मचारी नदारद थे तो वहीं समाज कल्याण कार्यालय के 10 में से चार कर्मचारी नहीं पहुंच पाए थे।
डीएम विवेक विकास भवन का औचक निरीक्षण करने पहुंचे तो अन्य विभागों को मिलाकर कुल 17 कर्मचारी गैरहाजिर पाए गए। इन सभी का वेतन भुगतान न किए जाने का निर्देश देते हुए उनसे स्पष्टीकरण लेने को कहा गया है। इसके अलावा दो विभागों के लिपिकों को भी लापरवाही के लिए नोटिस जारी किया गया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी को अत्यंत शिथिल पर्यवेक्षण का दोषी पाते हुए सुधार के लिए कहा गया। डीएम ने कहा कि यह अत्यंत खेदजनक है कि अधिकारी अपने दफ्तर के कर्मचारियों पर ठीक से नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं।
विकास भवन में कर्मचारियों की लापरवाही व मनमानी दूर करने के उद्देश्य से डीएम विवेक ने शनिवार को साढ़े 10 बजे औचक निरीक्षण किया तो जिला ग्राम्य विकास अभिकरण कार्यालय के दो कर्मचारी आशुतोष द्विवेदी व सतीश गुुप्त अनुपस्थित पाए गए। इनके वेतन पर स्पष्टीकरण आने तक रोक लगाए जाने का निर्देश दिया गया।
यहां स्थापना सहायक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लेने के लिए निर्देशित किया गया। जिला अर्थ संख्या अधिकारी कार्यालय में 14 में से आठ कर्मचारी उमेश श्रीवास्तव, विनोद कुमार, आशा गौतम, बजरंगबली, रामउजागिर, वासुदेव भारती, यासीन व मुन्नरलाल गैरहाजिर थे।
समाज कल्याण कार्यालय में 10 में से चार कर्मचारी जगन्नाथ प्रसाद, नफीसुलहसन, श्रीशचंद्र व अखंड प्रताप गैरहाजिर पाए गए। अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में चतुर्थ श्रेेणी कर्मचारी फातिमा अनुपस्थित थीं। जिला प्रबंधक अनुगम कार्यालय में छह कर्मचारियों के सापेक्ष एक कर्मचारी विश्वनाथ शर्मा तब तक कार्यालय नहीं पहुंच पाए थे।
इन सभी का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने के साथ ही समाज कल्याण विभाग के लिपिक से स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया गया। समाज कल्याण कार्यालय के लिपिक को रजिस्टरों का बेहतर रखरखाव न करने को लेकर नोटिस जारी कराया गया।
इसके अलावा जिला समाज कल्याण अधिकारी को शिथिल पर्यवेक्षण का दोषी मानते हुए उन्हें हिदायत दी गई। डीएम ने कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर विभागाध्यक्षों से भी नाराजगी जाहिर की। कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारियों का अपने ही कर्मचारियों पर समुचित नियंत्रण नहीं है।