अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए जूझ रहे मरीजों का संकट और बढ़ गया है। डॉक्टरों की कमी की वजह से यहां पहले ही मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। अब शासन से पांच डॉक्टरों की संबद्धता खत्म कर उन्हें मूल जगह भेजने का निर्णय कर लिया गया है।
इनमें कई विशेषज्ञ चिकित्सक भी हैं। दरअसल, जिला अस्पताल में 33 चिकित्सकों की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन आठ पहले से ही कम थे। किसी तरह संबंद्ध चिकित्सकों से काम चलाया जा रहा था। अब इन्हें भी यहां से हटाने का निर्णय हो गया है। इस तरह 20 चिकित्सक ही बचेंगे यानी अब 13 डॉक्टर कम हो जाएंगे।
चिकित्सकों की इस कदर कमी कितनी भारी पड़ने वाली है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां ओपीडी में हर दिन करीब एक हजार मरीज आते हैं। हालांकि, जिला चिकित्सालय प्रशासन ने प्रकरण को लेकर निदेशालय व शासन को पत्र भेजने का निर्णय लिया है।
जिला अस्पताल में लंबे समय से चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है। इससे अच्छे इलाज की आस लेकर आने वाले मरीजों के लिए समस्याएं खड़ी हो रही हैं। बताते चलें कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 33 पद हैं।
इसके सापेक्ष 20 पर ही तैनाती है। मरीजों की समस्या कम करने के लिए बीते दिनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित सरकारी अस्पतालों से पांच चिकित्सक को जिला अस्पताल से संबद्ध कर दिया गया था। इनमें एमडी डॉ. योगेश, फिजीशियन डॉ. मनोज शुक्ला, आई सर्जन डॉ. अतीक आलम, आर्थो सर्जन डॉ. संजय व फिजीशियन डॉ. अजीत शामिल हैं। संबंधित चिकित्सकों की संबद्धता के बावजूद प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले एक हजार से अधिक मरीजों को मुश्किलें उठानी पड़ती हैं।
इस बीच शासन ने पत्र आ गया कि भेजकर निर्देशित किया कि जो चिकित्सक संबद्धता के आधार पर कार्य कर रहे हैं, उन्हें मूल तैनाती वाले अस्पताल भेज दिया जाए। ऐसे में डॉ. योगेश को जमुनीपुर, डॉ. मनोज शुक्ला को भियांव, डॉ. अतीक आलम को जलालपुर, डॉ. संजय को बसखारी व डॉ. अजीत को मया अयोध्या भेजने का निर्देश दिया गया। अब यदि ये चिकित्सक मूल तैनाती वाले अस्पताल जाते हैं तो जिला अस्पताल में 20 चिकित्सक ही रह जाएंगे। ऐसे में जाहिर तौर पर मरीजों को और मुश्किल होने वाली है।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल में पांच संबद्ध चिकित्सकों के जाने से मरीजों के समक्ष अच्छे इलाज की बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। दरअसल, जिला अस्पताल में बीते दिनों शुरू हुए 100 बेड वाले मातृ शिशु विंग में अब तक चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में इस विंग के संचालन की जिम्मेदारी भी जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सकों पर है।
ऐसे में पांच चिकित्सकों के जाने पर न सिर्फ जिला अस्पताल बल्कि मातृ शिशु विंग में भी मरीजों का इलाज प्रभावित होगा। सबसे अधिक समस्या आर्थो व नेत्र रोग के मरीजों के सामने हो सकती है। कारण यह कि जिला अस्पताल में डॉ. प्रदीप आर्थो सर्जन व डॉ. पंकज आई सर्जन की स्थाई तैनाती है। संबद्ध आई सर्जन डॉ. अतीक आलम व आर्थो सर्जन डॉ. संजय के चले जाने से सारी जिम्मेदारी इन्हीं पा आ जाएगी।
सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष पाठक ने कहा कि सस्ते व बेहतर इलाज की उम्मीद में बड़ी संख्या में मरीज जिला अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की कमी के चलते यदि उन्हें समुचित इलाज की सुविधा नहीं मिली तो मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। मरीजों के हित को देखते हुए रिक्त चल रहे पदों पर चिकित्सकों की तैनाती की जाए, जिससे मरीजों का अच्छा इलाज हो सके।
जिला अस्पताल में पहले से ही चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में यदि पांच संबद्ध चिकित्सकों को उनके मूल तैनाती वाले अस्पताल में भेजा जाता है तो समस्या और बढ़ जाएगी। मरीजों के हित को देखते हुए शासन को पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है।
- डॉ. एसपी गौतम, सीएमएस