अंबेडकरनगर। गेहूं खरीद का कार्य समाप्त होने में मात्र 15 दिन शेष रह गए हैं, लेकिन लक्ष्य से कोसों दूर है खरीददारी। दो माह में सात एजेंसियों के 100 केंद्रों पर 8337 किसानों के मात्र 39373.47 एमटी गेहूं की ही खरीद हो सकी है जो कि लक्ष्य 71 हजार 500 एमटी के सापेक्ष मात्र 55.7 प्रतिशत ही है। विगत वर्ष 31 मई तक लक्ष्य के सापेक्ष 73.92 प्रतिशत खरीद हुई थी।
जिम्मेदार अधिकारियों व केंद्र प्रभारियों की लापरवाही व जिले में भंडारण की समुचित व्यवस्था न होने से ही खरीद का कार्य गति नहीं पकड़ सका। अब जबकि खरीद का कार्य समाप्त होने में मात्र 15 दिन शेष हैं तो ऐसे में लक्ष्य की पूर्ति किस प्रकार की जा सकेगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
एक अप्रैल से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सात एजेंसियों के 100 केंद्रों पर शुरू हुआ गेहूं खरीद का कार्य अब अंतिम दौर में है। 15 जून तक गेहूं खरीद का कार्य होना है, लेकिन खरीद का लक्ष्य पूरे करने से कोसों दूर है विभाग। खाद्य एवं विपणन विभाग के अनुसार 31 मई तक 8 हजार 337 किसानों का 39373.47 मीट्रिक टन की खरीददारी हो सकी है, जो कि लक्ष्य के सापेक्ष 55.7 प्रतिशत है।
कार्यालय के लिपिक शैलेंद्र कुमार ने बताया कि खाद्य विभाग द्वारा 2817 किसानों का 15690 एमटी, पीसीएफ द्वारा 3882 किसानों का 15346.551 मीट्रिक टन, यूपीपीसीयू द्वारा 1134 किसानों का 5532.12 एमटी, कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा 196 किसानों का 1368.20 एमटी, यूपीएसएस द्वारा 185 किसानों का 852.95 मीट्रिक टन व भारतीय खाद्य निगम द्वारा 123 किसानों का 583.65 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई।
गेहूं खरीद में जिम्मेदार अधिकारियों व केंद्र प्रभारियों की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विगत वर्ष के सापेक्ष 18.2 प्रतिशत गेहूं की खरीद कम हुई है। विगत वर्ष 31 मई तक जहां लक्ष्य के सापेक्ष 73.92 प्रतिशत गेहूं की खरीद हुई थी, वहीं इस वर्ष 31 मई तक मात्र 55.7 प्रतिशत ही गेहूं की खरीद हुई है। अब जबकि गेहूं खरीद का मात्र 15 दिन शेष रह गया है, तो ऐसे में लक्ष्य की पूर्ति किस प्रकार की जाएगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
प्रदेश सरकार द्वारा समर्थन मूल्य 1860 रुपये प्रति क्विंटल है। बीते दिनों आढ़तियों द्वारा 1700 रुपये प्रति कुंतल की खरीद की जा रही थी, जिससे किसान उपज की बिक्री करने के लिए संबंधित केंद्र तक जा रहे थे। गत दिवस वारणसी की मंडी में गेहूं के दाम में आए उछाल के बाद आढ़ती अब समर्थन मूल्य के लगभग बराबर मूल्य ले रहे हैं। ऐसे में किसान केंद्र तक जाने की बजाए आढ़तियों के हाथों उपज की बिक्री करना अधिक अच्छा समझ रहे। दरअसल उन्हें तत्काल नगद भुगतान हो जाता है। आढ़तियों के हाथों उपज बेचने के चलते ही केंद्रों पर सन्नाटा पसर गया है।
गेहूं खरीद के कार्य में तेजी लाने के लिए एजेंसियों के अधिकारियों व केंद्र प्रभारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। डीएम के निर्देश पर सभी पांच एसडीएम व 6 अन्य जिलास्तरीय अधिकारियों की कुल 11 टीम का गठन किया गया है जो पीसीएफ के 55 केंद्रों का जायजा लेंगी। इसमें खरीद व भुगतान के बारे में जानकारी प्राप्त की जाएगी।
- अजित प्रताप सिंह, खाद्य एवं विपणन अधिकारी