अंबेडकरनगर। बेटे रितेश पाण्डेय के सांसद निर्वाचित होते ही गुरुवार को पूर्व सांसद व पिता राकेश पाण्डेय खुद की भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। खुशी में बेटे को गले लगाया तो आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। जब बेटे की सफलता पर लोग उन्हें बधाई दे रहे थे तब भी वे भावुक हो उठे।
हुए जा रहे थे। लंबे समय से राजनीति कर रहे एक पिता की आखों में खुशी के आंसू देख वहां मौजूद तमाम लोग भी खुद पर नियंत्रण नहीं रख सके।
करीब तीन दशक से राजनीति में सक्रिय पूर्व सांसद राकेश पाण्डेय के लिए गुरुवार का दिन बेहद खास रहा। बेटे को सांसद बनाने का जो सपना उन्होंने देखा था, वह साकार हो चुका था।
एक बड़ा सपना तथा बड़ा लक्ष्य पूरा हो जाने की खुशी गुरुवार को पूर्व सांसद के चेहरे व हावभाव पर सुबह से ही साफ परिलक्षित हो रही थी। समर्थकों द्वारा मतगणना शुरू होने के साथ आवास पर मौजूद पूर्व सांसद को ज्यों ज्यों बसपा, सपा व रालोद गठबंधन के प्रत्याशी रितेश के आगे निकलने की खबर दी जा रही थी, त्यों त्यों उनके चेहरे पर खुशी के भाव बढ़ते जा रहे थे।
हालांकि मतदान के बाद मिले फीडबैक के बाद से ही वे जीत को लेकर आश्वस्त थे, लेकिन गुरुवार सुबह जब पूरे देश में भाजपा की लहर समाचार चैनलों के माध्यम से सामने आने लगी तो थोड़ी-बहुत चिंता बढ़ी। हालांकि इन सबके बीच ही चरण दर चरण रितेश के आगे बढ़ते जाने की सूचना इन चिंताओं को पीछे छोड़ रही थी।
अपराह्न तीन बजे के करीब जब रितेेश की जीत का अंतर 75 हजार के करीब पहुंच गया तो पूर्व सांसद राकेश पाण्डेय अपने बेटे की जीत तय देख भावुक हो उठे। उन्होंने कुछ देर बाद कार्यकर्ताओं के एक अलग ग्रुप के साथ बैठकर चर्चा कर रहे रितेश को अपने पास बुलाया और गले लगाकर बधाई दी। इस दौरान वह अपनी भावनाओं को काबू में नहीं रख सके। उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
सांसद निर्वाचित होने जा रहे रितेश ने पिता को भावुक होते देखा तो हौले से मुस्कुराकर उन्हें शांत करने की कोशिश करने लगे।
रितेश ने इसके बाद पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर से कार्यकर्ताओं की तरफ चले गए। उधर, जीत का अंतर बढ़ने के साथ ही आवास पर लोगों के आने का सिलसिला तेज हो चुका था। सांसद बनने जा रहे रितेश की अपेक्षा उनके पिता राकेश पाण्डेय को बधाई देने के लिए लोग ज्यादा उत्सुक थे। नतीजा यह कि बेटे की जीत पर खुद को बधाई मिलने के दौरान भी पूर्व सांसद कई बार भावुक हुए।