अंबेडकरनगर। कांग्रेस के जिस प्रत्याशी उमेद निषाद का नामांकन पत्र बुधवार को जांच में खारिज कर दिया गया, उनके चुनाव लड़ने को लेकर दरअसल उहापोह की स्थिति प्रत्याशी घोषित होने के बाद से लेकर नामांकन तक बनी रही। ऐसे में अब परचा खारिज होने को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी ने हालांकि प्रशासन पर साजिश का आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि उन्हें गड़बड़ी सुधारने के मौके दिए गए थे।
दस्यु सुंदरी रही फूलन देवी के पति उमेद निषाद को टिकट मिलना जितना नाटकीय रहा, उतने ही नाटकीय ढंग से उनके मौजूदा संसदीय चुनाव लड़ने के दौर का अंत भी हो गया। गौरतलब है कि तमाम उम्मीदवारों के बीच कांग्रेस पार्टी ने उमेद को टिकट थमाया था। पार्टी ने जिस दिन उनके टिकट की घोषणा की थी, उसी दिन सोशल मीडिया पर उनकी एक फोटो वायरल हुई, जिसमें वे हरियाणा की जननायक जनता पार्टी में शामिल होते दिख रहे थे। यह फोटो तेजी से सामने आनी शुरू हुई, तो कार्यकर्ताओं में भ्रम फैल गया। हालांकि उमेद ने बाद में स्पष्ट किया कि वे चुनाव लड़ने अंबेडकरनगर आ रहे हैं। उनका टिकट नामांकन शुरू होने से ठीक पहले घोषित हुआ था।
इसके बावजूद टिकट घोषित होने के अगले दो दिन तक वे जिले में नहीं पहुंचे। इसके बाद वे यहां आए भी, तो सीधे पार्टी कार्यालय न जाकर एक परिचित के घर चले गए, जहां चंद लोगों से ही मिले। अगले दिन कार्यकर्ताओं ने अतिउत्साह में एक सार्वजनिक कार्यक्रम तय किया, तो उसमें भागीदारी की बजाए वे लखनऊ पहुंच गए। ऐसे में कार्यक्रम शुरू होने से एक घंटे पहले उसे आननफानन निरस्त करना पड़ा। इससे कार्यकर्ताओं का उहापोह और बढ़ गया।
नामांकन की तैयारियों को लेकर न तो ब्लॉक व विधानसभावार बैठक की गई और न ही नामांकन में। प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर के आने की सूचना के बावजूद उसका कोई प्रचार-प्रसार नहीं कराया गया। इन्हीं सब स्थितियों के बीच अब नामांकन पत्र खारिज हो जाने से कार्यकर्ताओं के बीच फिर से तरह तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी उमेद निषाद का कहना है कि प्रशासन को नियमानुसार नामांकन पत्र की कमियों को नोटिस देकर इंगित करना चाहिए था।
प्रशासन ने एक नोटिस देकर बैंक एकाउंट न दिए जाने की जानकारी दी थी, जिस पर उसे उपलब्ध करा दिया गया था। यदि किसी कॉलम में कोई जानकारी छूट गई थी, तो उसे भी नोटिस देकर दुरुस्त करने का नियमानुसार मौका दिया जाना चाहिए था, जैसा तमाम जगहों पर होता आया है। उमेद ने कहा कि ऐसा सत्तारूढ़ दल के दबाव में किया गया है। वे इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से करेंगे। उधर जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेश कुमार ने कहा कि प्रशासन ने सब कुछ नियमानुसार किया है। इसमें किसी तरह की आपत्ति का अब कोई सवाल नहीं उठता है। निरर्थक के आरोपों पर उन्हें कुछ नहीं कहना है।