टांडा (अंबेडकरनगर)। पूर्वोत्तर के राज्यों को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण में शामिल दुद्धी लुंबनी राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-233 के निर्माण में कुल 43 गांव के किसानों के दर्द को सुनने वाला कोई नहीं है। सड़क निर्माण के समय से लेकर लगातार यह किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते चले आ रहे हैं, जिसमें कई गांव के किसानों को तो इसका कुछ लाभ मिल गया। परंतु अभी भी 43 गांव के 6 हजार से अधिक किसानों की मांग पर प्रशासन की तरफ से न तो कोई ठोस कदम उठाया गया है, और न ही इन किसानों को संतुष्ट किया जा सका है। इसके कारण अब इन गांवों के किसानों ने चुनाव में मतदान बहिष्कार की चेतावनी दी है। जिलाधिकारी समेत अन्य उच्चाधिकारियों को इस बाबत पत्र भी भेज दिया गया है।
किसानों की लड़ाई में उनकी कानूनी मदद कर रहे अधिवक्ता रामसागर यादव का कहना है कि 43 गांव के काश्तकारों की भूमि इस राष्ट्रीय राजमार्ग को बनाने में ली गई है। इसमें प्रशासन द्वारा आलापुर तहसील क्षेत्र के कुछ गांवों में किसानों की सड़क से सटी 51 एकड़ भूमि का मुआवजा सर्किल रेट में निर्धारित आवासीय दर का चार गुना दिया गया जो लगभग 10 से 12 लाख रुपये प्रति बिस्वा बना है, जबकि अधिकांश किसानों को खेती के दर से निर्धारित सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दिया गया, जो मुश्किल से 80 हजार से एक लाख 20 हजार रुपये प्रति बिस्वा बन रहा है।
इन गांवों के प्रभावित किसानों का आरोप है कि जब कोई सामान्य व्यक्ति अपने निजी उपयोग के लिए सड़क के किनारे कोई भूमि खरीदता है तो सर्किल रेट में निर्धारित किये गए नियम के अनुसार उसे खेती के बजाय आवासीय दर पर ही स्टांप अदा करना पड़ता है, लेकिन जब किसान को मुआवजा देने की बारी आई तो प्रशासन उनकी कोई बात नहीं सुन रहा है। इन किसानों की लड़ाई में भारतीय किसान यूनियन भी इनके साथ है।
किसान यूनियन मंडल अध्यक्ष लल्लू वर्मा ने बताया कि किसानों के मुआवजे की समस्या पूर्व में काफी हद तक बातचीत से हल हो गई थी, और आलापुर तहसील क्षेत्र के न्यौरी व अमड़ी तथा टांडा तहसील क्षेत्र के दौलतपुर हाजलपट्टी सहित कई अन्य गांव के किसानों को आवासीय सर्किल रेट का चार गुना प्रतिकर दिया गया। हालांकि फिर से गतिरोध उत्पन्न हो गया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि अविलंब उनकी मांगों को न सुना गया तो वह लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने पर बाध्य होंगे। डीएम सुरेश कुमार ने कहा कि किसी के साथ भेदभाव जैसी बात नहीं है। नियम के अनुसार ही सभी प्रक्रिया संपन्न कराई जा रही है।