टांडा (अंबेडकरनगर)। सरयू नदी के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि ने माझा क्षेत्र के जायद फसल के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नदी के किनारे बालू पर उगाई जाने वाली ककड़ी, खीरा, कोहड़ा, तरबूज, खरबूज आदि फसलों के डूबने की आशंका उत्पन्न हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि इसी प्रकार से जलस्तर में वृद्धि होती रही, तो रेत पर उगाई गई पूरी फसल जलमग्र हो जाएगी, जिससे लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा।
बीते शुक्रवार अपराह्न लगभग 3 बजे से अचानक सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई। यह सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। जलस्तर में हुई वृद्धि से नदी के किनारे रेत पर बोई गई खीरा, ककड़ी, कोहरा, लौकी, तरबूज व खरबूज समेत अन्य जायद की फसलों तक पानी पहुंच गया है। इसके अलावा माझा क्षेत्र के खेतों तक भी नदी का पानी पहुंचने को बेताब है।
माना जा रहा है कि यदि इसी प्रकार से जलस्तर में वृद्धि होती रही, तो एक दो दिन में रेत पर बोई गई जायद की फसल पूरी तरह जलमग्र हो जाएगी। मुबारकपुर के मंगरू मांगी व गुड्डू मांझी ने कहा कि उन्होंने नदी के किनारे रेत पर उन्होंने ककड़ी, खीरा, कोहड़ा, लौकी व तरबूज की खेती की है। जलस्तर बढ़ने से फसल के जलमग्न होने की आशंका बढ़ गई है। यदि ऐसा होता है, तो इससे उन्हें लागत निकालना मुश्किल होगा।
छज्जापुर के अभय मांझी व संतोष ने कहा कि उन्होंने जायद की सभी फसलों की बुआई नदी के किनारे बालू में बुआई की है। तरबूज व खरबूज की फसल तो अभी नहीं तैयार है, लेकिन ककड़ी, खीरा, कोहड़ा व लौकी का तैयार होना शुरू हो गया है। जिस प्रकार से जलस्तर में वृद्धि हो रही है, उससे फसल को व्यापक नुकसान हो सकता है। इसी प्रकार कम्हरिया क्षेत्र में खेतों तक भी पानी पहुंचने को बेताब है। यदि जलस्तर में वृद्धि लगातार जारी रही, तो खेतों तक पानी पहुंच जाएगा, जिससे जायद की फसल को नुकसान हो सकता है।