अंबेडकरनगर। मानिकपुर ग्राम सभा में चल रहे संगीतमयी श्रीराम कथा में कथावाचक स्वामी बालक दास जी महाराज ने वैवाहिक संबंधों के बारे में बताते हुए कहा कि लोग वैवाहिक जीवन में आंतरिक गुणों को नजर अंदाज कर बाहरी सुंदरता को अधिक महत्व देने लगे हैं, जिसके फलस्वरूप लोगों के वैवाहिक संबंध में तमाम प्रकार की समस्याएं उभरकर सामने आती हैं।
कथावाचक ने कहा कि माता सीता ने हम सभी को यह शिक्षा दिया है कि शारीरिक सौन्दर्य के प्रति आकर्षण और उसे प्राप्त करने की इच्छा विनाशकारी होती है। कहा कि सच्चा सच्चे के साथ और झूठा झूठे के साथ रहता है। सच्चे और झूठे की जोड़ी ज्यादा समय तक नहीं टिकती है। यही कारण है कि जब नकली मृग ने मरते समय लक्ष्मण को पुकारा तो द्वार पर खड़े असली लक्ष्मण ने नहीं सुना।
आज के समय में हमारे घर की दहलीज ही लक्ष्मण रेखा है, जिसका विचार घर में पुरुषों की अनुपस्थिति में घर की महिलाओं को रखनी चाहिए। सीता जी ने जब लक्ष्मण से मर्म वचन अर्थात यह कहा कि जब एक सौतले देवर के कारण हम पति पत्नी को बनवास हो गया है तो तुम कौन से सगे देवर हो, जो हमारा कहा मानकर प्रभु की सहायता के लिए जाओगे।
प्रभु की प्रेरणा से कहे इन वचनों को सुनकर लक्ष्मण का मन विचलित हो गया और वे सीता जी के पास से प्रभु राम के पास चले गए। मरम बचन जब सीता बोला, हरि प्रेरित लछिमन मन डोला। कथावाचक ने कहा कि जीवन में बहुत कुछ हासिल करना जीवन की सार्थकता नहीं है, लेकिन आज लोग इसी में अपने जीवन की संपूर्ण सफलता देखते हैं। जीवन की सार्थकता के लिए राम नाम का सुमिरन भी बहुत जरूरी है, जिसे देखते हुए प्रभु नाम स्मरण करना चाहिए।