उत्तर प्रदेश वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधक संघ जिलाध्यक्ष रामवीर सिंह यादव के नेतृत्व में शुक्रवार को सदस्यों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। पत्र में जूनियर कक्षा तक के स्ववित्त पोषित विद्यालयों को मान्यता के लिए जारी शासनादेश को वापस लिए जाने की मांग की है।
संघ जिलाध्यक्ष ने बताया कि बहुत कम शुल्क लेकर बिना किसी सरकारी सहयोग के जूनियर कक्षा तक संचालित निजी विद्यालय प्रदेश भर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहे हैं लेकिन 11 जनवरी को सरकार द्वारा जारी शासनादेश इन विद्यालयों के कार्यों में कठिनाई खड़ा कर सकते हैं।
शासनादेश में जूनियर तक निजी स्कूलों की मान्यता के आवेदन शुल्क को पूर्व से पांच गुना तथा सुरक्षित कोष को 20 गुना तक बढ़ा दिया गया है जो बहुत अधिक है। रजिस्टर्ड किराए वाले भवनों की जगह विद्यालय समिति के नाम वाली जमीन पर मान्यता मिलने से 80 प्रतिशत विद्यालय मान्यता लेने में सक्षम नहीं हो पाएंगे।
इससे प्रदेश में शिक्षा का स्तर बड़े पैमाने पर गिरेगा जो किसी भी नजरिए से उचित नहीं कहा जा सकता। जनपद में संचालित सैकड़ों विद्यालयों में 10 हजार प्रबंधक, शिक्षक व कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
ऐसे में इस शासनादेश के लागू हो जाने से वे बेरोजगार हो सकते हैं। ऐसे में सरकार को इस शासनादेश पर दोबारा विचार करने की जरूरत है, जिससे निजी संस्थाओं के शिक्षकों के हितों की रक्षा की जा सके। इस मौके पर मनोज वर्मा, सुखीराम, संतोष कुमार मौर्य, सुरेंद्र कुमार, मुकेश कुमार, अजय यादव, रामशेखर पाल व विक्रमजीत यादव आदि मौजूद रहे।