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43 एंबुलेंस के सापेक्ष 22 में स्ट्रेचर नदारद, मरीजों को हो रही मुश्किल

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43 एंबुलेंस में सिर्फ 22 स्ट्रेचर, मरीज बेहाल
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अंबेडकरनगर। यदि एंबुलेंस से मरीज को अस्पताल के अंदर ले जाना हो, तो आप अपनी बाहों को ही स्ट्रेचर बना लीजिए या फिर जिला अस्पताल से स्ट्रेचर लेने के लिए कर्मचारियों से झगड़ा कीजिए। यदि आधार कार्ड नहीं है, तो फिर जिला अस्पताल से भी स्ट्रेचर मिलना मुश्किल है। मौजूदा समय में कुछ ऐसे ही हालात हैं। मरीजों के लिए लाइफ लाइन बन जिले की सड़कों पर दौड़ रहीं 43 एंबुलेंस सेवाओं के सापेक्ष 22 एंबुलेंस में स्ट्रेचर नहीं नदारद है। जिन 21 एंबुलेंस में स्ट्रेचर है भी, वह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में एंबुलेंस से मरीजों को जिला अस्पताल के अंदर ले जाने में तीमारदारों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

मरीजों के लिए लाइफ लाइन साबित होने वाली एंबुलेंस सेवा को मौजूदा समय में खुद ही इलाज की दरकार है। जिले में कुल 43 एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ रही हैं। इसमें 108 सेवा की 17, जबकि 102 सेवा की 26 एंबुलेंस हैं। इनमें से 22 एंबुलेंस ऐसी हैं, जिसमें स्ट्रेचर ही नहीं है। 108 सेवा के 17 वाहनों के सापेक्ष 10 व 102 के 26 एंबुलेंस के सापेक्ष 12 एंबुुलेंस में स्ट्रेचर नदारद है। नतीजा यह है कि जब इन एंबुलेंस से मरीज जिला अस्पताल पहुंचते हैं, तो स्ट्रेचर न होने के चलते तीमारदारों को खुद ही मरीज को अंदर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। चूंकि जिला अस्पताल में भी स्ट्रेचर की कमी है, इसके चलते अक्सर तीमारदारों की जिला अस्पताल के कर्मचारियों से झड़प होती रहती है। दरअसल जिला अस्पताल में भी मात्र 6 स्ट्रेचर ही है। इसमें भी 3 क्षतिग्रस्त है।
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तीमारदारों का कहना है कि जिला अस्पताल के स्ट्रेचर का प्रयोग करने के लिए आधार कार्ड कर्मचारियों द्वारा मांगा जाता है। यदि आधार कार्ड न हो, तो स्ट्रेचर नहीं मिलता। ऐसे में मजबूर होकर खुद ही मरीज को उठाकर अंदर ले जाना पड़ता है। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। एंबुलेंस से बेवाना से मरीज रामजनम जिला अस्पताल परिसर पहुंचा। उसमें स्ट्रेचर नहीं था। इस पर तीमारदारों ने अस्पताल से स्ट्रेचर की मांग की। कर्मचारियों ने आधार कार्ड मांगा। इसे लेकर कुछ देर तक दोनों में झड़प होती रही। बाद में एक तीमारदार के पास आधार कार्ड था। उसे देने के बाद ही स्ट्रेचर उपलब्ध हो सका।

मरीजों के हित की नहीं परवाह
जिला अस्पताल में मिले कटेहरी से आए तीमारदार मो. इस्माइल ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मरीजों के हित की कोई परवाह नहीं है। स्ट्रेचर न होने से तीमारदारों को खुद ही अपने मरीज को उठाकर अस्पताल के अंदर ले जाना पड़ता है। भीटी से आए तीमारदार रामफेर ने कहा कि मरीजों के हित को देखते हुए न सिर्फ एंबुलेंस, बल्कि अस्पताल में भी पर्याप्त मात्रा में स्ट्रेचर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। महरुआ के संतोष व बनगांव के संतराम ने कहा कि स्ट्रेचर के लिए अक्सर कर्मचारियों से लड़ाई करनी पड़ती है। बगैर आधार कार्ड के एंबुलेंस से आए मरीज को अंदर ले जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिल पाता।

शासन को भेजा गया है पत्र
102 व 108 की कुल 22 एंबुलेंस में स्ट्रेचर नहीं है। इसके लिए कई बार शासन को पत्र लिखा गया है। स्ट्रेचर के बगैर कई बार मरीजों व उनके तीमारदारों के समक्ष मुश्किल खड़ी होती है। - मुजक्किर, प्रभारी एंबुलेंस सेवा
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उपलब्ध कराया जाता है स्ट्रेचर
बाहर से आने वाले मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में यदि स्ट्रेचर की आवश्यकता होती है, तो उसे उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि अस्पताल में भी स्ट्रेचर की कमी है। इसके बावजूद मरीजों को स्ट्रेचर उपलब्ध कराया जाता है। - डॉ. एसपी गौतम, सीएमएस
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