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सैलरी आदि पर लाखों का खर्च, स्कूल में बच्चे सिर्फ 12

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लाखों का खर्च, स्कूल में बच्चे सिर्फ 12
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अंबेडकरनगर। लाखों की सैलरी प्रत्येक वर्ष ले रहे परिषदीय शिक्षकों को विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने की फिक्र नहीं। हालत यह है कि प्राथमिक विद्यालय कटेहरी द्वितीय में शिक्षकों के वेतन से लेकर अन्य मद में प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं लगभग दो लाख रुपये लेकिन वहां अध्ययनरत हैं सिर्फ 12 बच्चे। कुछ ऐसा ही हाल जिले के तमाम परिषदीय विद्यालयों का है। 50 से अधिक ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं, जहां छात्र-छात्राओं की संख्या तो 25 से कम है, लेकिन शिक्षकों के वेतन, एमडीएम अन्य खर्च को मिलाकर प्रत्येक माह दो से तीन लाख रुपये का खर्च हो रहा है। ऐसे विद्यालयों में अधिकांश कक्षाओं में छात्र-छात्राओं की संख्या दहाई से कम है।

जिले के परिषदीय विद्यालयों में मनमाना माहौल है। छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा देने के लिए गुरूजी को भारी भरकम वेतन तो दिया जा रहा है, लेकिन उन्हें छात्र संख्या बढ़ाने की फिक्र नहीं। जिले में कुल 1873 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 50 से अधिक ऐसे विद्यालय हैं, जहां छात्र-छात्राओं की संख्या 25 से भी कम है। बच्चों की संख्या कम होने से गुरूजी सभी को एक ही कक्ष में बैठाकर उन्हें शिक्षा देने की औपचारिकता पूरी कर देते हैं। एक दर्जन विद्यालय तो ऐसे हैं, जहां छात्र-छात्राओं की संख्या 12 से 15 के बीच है। इन्हें दो-दो शिक्षक शिक्षा दे रहे हैं। वरिष्ठता व कनिष्ठता के आधार पर दो शिक्षकों वाले विद्यालय में प्रत्येक माह वेतन, एमडीएम आदि को मिलाकर औसत खर्च दो लाख रुपये के आस पास है। इसमें शासन द्वारा चलायी जाने वाली योजनाओं को शामिल कर दिया जाए तो औसत खर्च ढाई लाख रुपये के आस पास पहुंच जाता है। लाखों के खर्च के बावजूद विद्यालयों में न तो छात्र संख्या बढ़ाए जाने को लेकर शिक्षकों में रुचि दिख रही, और न ही विभागीय अधिकारियों की तरफ से ऐसे विद्यालयों में शिक्षकों की जिम्मेदारी तय हो पा रही है।
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यह है विद्यालयों की हकीकत
बीएसए कार्यालय के अनुसार प्राथमिक विद्यालय कटेहरी द्वितीय में छात्रों की कुल संख्या 12 है, जबकि शिक्षकों की संख्या दो है। यहां कक्षा एक में 1, कक्षा दो में 4, कक्षा तीन में 3, कक्षा चार में 2 व कक्षा पांच में मात्र 2 बच्चे पंजीकृत हैं। प्राथमिक विद्यालय रेवती का पूरा में भी कुल 12 छात्र पंजीकृत हैं। यहां कक्षा 5 में एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है। यहां शिक्षकों की संख्या दो है। प्राथमिक विद्यालय शहजादपुर में 14 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां भी कक्षा पांच में कोई छात्र पंजीकृत नहीं है। इसमें कक्षा 1 में तीन, कक्षा 2 में 2, कक्षा 3 में छह व कक्षा 4 में तीन छात्र पंजीकृत हैं।

यहां भी दो शिक्षकों की तैनाती है। प्राथमिक विद्याल रुस्तमपुर में 2 शिक्षक मात्र 14 बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। यहां कक्षा 1 में तीन, कक्षा 2 में एक, कक्षा तीन में 2, कक्षा 4 में दो व कक्षा पांच में 6 बच्चे हैं। प्राथमिक विद्यालय सैदही में 16 बच्चों पर दो शिक्षक तैनात हैं। इसमें 4 छात्र व 12 छात्राएं हैं। प्राथमिक विद्यालय दहीरपुर में 18 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दो शिक्षकों पर है।

उच्च प्राथमिक विद्यालय सराय हरदो व सकरावल दक्षिण में मात्र दस-दस बच्चे पंजीकृत हैं। इन्हें शिक्षा देने के लिए दो-दो शिक्षकों की तैनाती है। उच्च प्राथमिक विद्यालय नसीरपुर कैथी व बेहजोरपुर में तैनात दो दो शिक्षक मात्र 12-12 बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय महेशपुर में 14 बच्चे पंजीकृत हैं। इन्हें शिक्षा देने की जिम्मेदारी दो शिक्षकों पर है। उच्च प्राथमिक विद्यालय लोहरा अमरतल में 16 बच्चों पर दो शिक्षक, उच्च प्राथमिक विद्यालय कोर्रा में 16 बच्चों पर दो शिक्षकों की तैनाती है।
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समायोजन होने पर होगा सुधार
शासन के निर्देश पर समायोजन प्रक्रिया होने पर ऐसे विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या में सुधार किया जाएगा। प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों को विद्यालय में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। -अतुल कुमार सिंह, बीएसए
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