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माह भर में 55 क्रय केन्द्रों ने लक्ष्य के सापेक्ष खरीदा सिर्फ 2 प्रतिशत धान

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अंबेडकरनगर। शासन प्रशासन के तमाम दावे व दिशा निर्देश का असर धान क्रय के लिए नामित एजेंसियों व क्रय केंद्र प्रभारियों पर नहीं दिख रहा है। खरीद का कार्य शुरू हुए एक माह का समय बीत गया, लेकिन अब तक जिले में स्थापित 55 क्रय केंद्र 744 किसानों का महज 2 हजार 823 मीट्रिक टन धान की खरीद कर सके, जो निर्धारित 1 लाख 32 हजार 600 मीट्रिक टन के सापेक्ष जो 2.13 प्रतिशत है। मनमाने ढंग से हो रही खरीद को लेकर बीते दिनों जिलाधिकारी द्वारा कई क्रय केंद्रों पर छापेमारी भी की गई, और कइयों पर कार्रवाई की गाज भी गिरी। इसके बावजूद क्रय केंद्र प्रभारियों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इसका खामियाजा जहां किसान भुगत रहे हैं, वहीं आढ़तियों की बल्ले बल्ले है।
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किसानों को उसकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के प्रयास पर जिले में क्रय केंद्र प्रभारियों की मनमानी भारी पड़ रही है। किसानों को धान बिक्री में कोई दिक्कत न हो इसके लिए शासन प्रशासन लगातार बैठकों का आयोजन कर रहा है। सुगमता से खरीद हो इसके लिए पहले ही 5 एजेंसियों के 55 क्रय केन्द्रों को निर्धारित कर दिया गया। शासन से आए 1 लाख 32 हजार 600 मीट्रिक टन की खरीद के लिए सभी एजेंसियों को अलग अलग लक्ष्य भी दे दिया गया। इसमें खाद्य विभाग के 8 क्रय केंद्रों को 48 हजार 600 मीट्रिक टन, पीसीएफ के 32 क्रय केंद्रों को 35 हजार, यूपीपीसीयू के 11 क्रय केंद्रों को 21 हजार, कर्मचारी कल्याण निगम के तीन क्रय केंद्रों को 10 हजार व भारतीय खाद्य निगम के 1 केंद्र को 18 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया है। शासन के निर्देश के अनुसार 1 नवंबर से जिले के विभिन्न क्रय केंद्रों पर खरीद का कार्य शुरू होना था। परंतु सहकारिता विभाग कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के चलते शुरुआती दौर में ही खरीद का कार्य प्रभावित हो गया। इसी बीच खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर एसोसियेशन ने भी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 5 नवंबर से हड़ताल शुरू कर दिया। करीब एक पखवारे तक खरीद का कार्य शुरू ही नहीं हो सका।
शासन प्रशासन के मान-मनौव्वल के बाद कर्मचारी हड़ताल से तो वापस लौट आए, लेकिन मनमानी का आलम यह कि क्रय केंद्रों पर किसानों के धान की खरीद की जिम्मेदारी नहीं समझी गई। शिकायतें बढ़ी तो डीएम ने कई क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। इसमें हकीकत सामने आयी, कुछ पर कार्रवाई की गाज गिरी तो कुछ को कार्य में लापरवाही की नोटिस जारी हुई। इसके बावजूद स्थिति में अब तक सुधार नहीं हो सका। आम शिकायत है कि किसानों को कोई न कोई बहाना बताकर वापस कर दिया जा रहा है। इसका ही परिणाम है कि खरीद कार्य शुरू हुए एक माह का समय बीत गया, लेकिन अब तक महज 2.13 प्रतिशत ही धान की खरीद हो सकी है।
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महज 744 किसानों की हो सकी खरीद
कार्य के प्रति लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि माह भर चले खरीद में सिर्फ 744 किसानों के 2 हजार 823 मीट्रिक टन ही धान की खरीद हो सकी। इसमें खाद्य विभाग ने 185 किसानों का 795.81 मीट्रिक टन, पीसीएफ ने 299 किसानों का 973.26 मीट्रिक टन, यूपीपीसीयू ने 187 किसानों का 696.930 मीट्रिक टन, कर्मचारी कल्याण निगम ने 59 किसानों का 300.400 मीट्रिक टन, भारतीय खाद्य निगम द्वारा 14 किसानों का 57.160 मीट्रिक टन धान की खरीद की है।

आढ़तिया उठा रहे मजबूरी का लाभ
क्रय केंद्रों पर जहां केंद्र प्रभारियों की मनमानी कायम है, वहीं आढ़ती इसका खूब लाभ उठा रहे हैं। रबी फसल की बुवाई का समय चल रहा। अकबरपुर के किसान दिलीप वर्मा व सुनील शर्मा का कहना है कि इन दिनों किसानों को गेहूं बीज, खाद व जुताई के लिए पैसे का प्रबंध करना है। ऐसे में उसके पास धान की बिक्री करने के शिवा और कोई विकल्प भी नहीं है। क्रय केंद्रों पर खरीद न होने के चलते उन्हें आढ़तियों को धान बिक्री करने को विवश होना पड़ रहा है। शासन तो समर्थन मूल्य 1750 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, लेकिन आढ़ती 1100 से 1200 रुपये ही प्रति क्विंटल धान की खरीद कर रहे हैं। इससे उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

खरीद में जल्द आएगी तेजी
नवंबर के प्रथम पखवारे तक किसानों के पास बिक्री के लिए पर्याप्त धान तैयार नहीं थे। इसके अलावा कर्मचारियों की हड़ताल से भी धान खरीद पर प्रभाव पड़ा है। जिलाधिकारी भी धान खरीद को लेकर सख्त है। सभी उपजिलाधिकारियों को भी डीएम ने दिशा निर्देश दिए हैं। आगामी दिनों में इसमें प्रगति देखने को मिलेगी। -अजित प्रताप सिंह, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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