अंबेडकरनगर। कर्मचारियों की तैनाती न होने से सवा अरब रुपये से बनकर तैयार सात अस्पतालों का संचालन नहीं हो पा रहा है। दो माह पहले इन अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर भी किया जा चुका है। इसके बावजूद संबंधित क्षेत्रों में मरीज इन अस्पतालों का संचालन शुरू होने की टकटकी लगाए हुए हैं। अस्पतालों का संचालन जल्द शुरू हो इसके लिए डीएम ने बीते दिनों स्टाफ व संसाधन के संदर्भ में प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र भी भेजा है। हालांकि अभी तक कोई प्रत्यक्ष प्रगति नहीं हो पायी है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी में जो अस्पताल मददगार साबित हो सकते हैं उनके संचालन की सुध जिम्मेदार लोग नहीं ले रहे हैं। वर्ष 2012-13 में भियांव, बसखारी, जलालपुर, भीटी व टांडा विकास खंड में 2 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से एक-एक मातृ एवं शिशु चिकित्सालय के निर्माण को शासन ने हरी झंडी दी थी। लोगों को उम्मीद बंधी कि अस्पताल के संचालन से अब जच्चा-बच्चा के बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल तक की लंबी दूरी नहीं तय करनी पड़ेगी। हालांकि समय बीतने के साथ उनकी उम्मीदों को झटका भी लगा है। कुल 13 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले इन अस्पतालों का निर्माण पूर्ण होने व लगभग दो माह पूर्व सीएमओ कार्यालय को हैंडओवर होने के बाद भी संचालन नहीं हो पा रहा है। कारण यह कि अब तक इन अस्पतालों में न तो स्टाफ की तैनाती की जा सकी है और न ही आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराया जा सका है। नतीजा यह है कि गर्भवती व नवजात शिशुओं के बेहतर इलाज के लिए परिवारीजनों को दूरदराज के अस्पतालों का चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
300 व 200 बेड के अस्पतालों का संचालन भी शुरू नहीं
वर्ष 2012-13 में जिला अस्पताल परिसर में अलग से 100 बेड के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय के निर्माण को शासन ने हरी झंडी प्रदान की थी। 20 करोड़ रुपये की लागत से इस अस्पताल का निर्माण भी पूर्ण हो चुुका है। दो माह पूर्व इसे भी स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया जा चुका है। इस अस्पताल का संचालन प्राइवेट संस्था द्वारा होना है, लेकिन अब तक न तो स्टाफ पहुंचा और न ही संसाधन। इसी प्रकार 87 करोड़ की लागत से वर्ष 2014-15 में टांडा में 200 बेड के मातृ एवं शिशु अस्पताल के निर्माण को भी शासन ने हरी झंडी प्रदान की थी। इसका निर्माण कार्य पूर्ण करने के बाद कार्यदायी संस्था ने लगभग दो माह पूर्व सीएमओ कार्यालय को हैंडओवर कर दिया। इसका संचालन भी निजी संस्था करेगी। दो माह बीतने को हैं, लेकिन स्टाफ की तैनाती न होने व संसाधनों के उपलब्ध न होने से इस अस्पताल का संचालन भी अब तक नहीं प्रारंभ हो सका है।
डीएम ने शासन को भेजा पत्र
सभी सात अस्पतालों के संचालन के लिए गत 18 अक्तूबर को जिलाधिकारी सुरेश कुमार ने शासन को पत्र भेजकर संबंधित अस्पतालों में स्टाफ की तैनाती किए जाने व संसाधन उपलब्ध कराए जाने की जरूरत पर बल दिया है। इसमें कहा गया कि 1 अरब 20 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से सात छोटे-बड़े अस्पतालों का संचालन जल्द कराए जाने की जरूरत है। ऐसे होने पर इसका लाभ ज्यादा से ज्यादा मरीजों को उपलब्ध कराया जा सकेगा।
चल रही प्रक्रिया
अस्पतालों के संचालन के लिए जरूरी प्रक्रिया चल रही है। शासन स्तर पर प्रकरण विचाराधीन है। जल्द ही निर्णय होने की उम्मीद है। -डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ