अंबेडकरनगर। प्रबोधिनी एकादशी पर सोमवार को मातृ-पितृ भक्त के प्रतीक श्रवण कुमार की तपोस्थली से शुरू हुई एक दिनी सप्तकोशी परिक्रमा में हजारों परिक्रमार्थियों का हुजूम उमड़ पड़ा। देर शाम तक चली परिक्रमा के दौरान रास्ते में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह मंदिरों में माथा भी टेका। इस बीच जिले भर में श्रद्धालुओं ने एकादशी व्रत भी रखा। बाजारों में शकरकंद, सिंघाड़ा व गन्ने की खूब बिक्री हुई। अकबरपुर नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक की बाजार इन चीजों से सजी नजर्र आइं। सत्यनारायण बाबा की कथा सुनने सहित कई जगहों पर अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। नदियों के विभिन्न पवित्र घाटों पर स्नान-दान के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने विधिविधान से पूजन कर भगवान विष्णु की आराधना की।
सोमवार को एकादशी पर्व के मौके पर जिले में विविध धार्मिक आयोजन हुए। अकबरपुर क्षेत्र में स्थित श्रवण कुमार की तपोस्थली से दशकों पहले से चली आ रही सप्तकोशी परिक्रमा के लिए सोमवार भोर से ही श्रद्धालुओं का श्रवणधाम पहुंचना शुरू हो गया। यह बात अलग है कि यहां पर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के हितों को देखते हुए कोई विशेष प्रबंध नहीं किए गए थे। तमसा व बिसुही नदी के संगम तट पर बदहाली पूरी तरह दिखी। यह बात अलग है कि स्थानीय लोगों ने मदद कर घाट पर पानी भरवा दिया था। ज्यादातर श्रद्धालुओं ने स्नान करने की बजाए हाथ-पैर धुलकर परिक्रमा शुरू की। श्रवण कुमार की मूर्ति के समक्ष श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, और इसके बाद परिक्रमा का शुभारंभ किया। प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के बीच लगभग 3 हजार श्रद्धालुओं ने परिक्रमा में हिस्सा लिया। परिक्रमार्थियों ने पवित्र शिवबाबा व शहजादपुर रामजानकी मंदिर के अलावा रास्ते में पड़ने वाले कई अन्य मंदिरों में भी माथा टेका, और पूजा भी की। परिक्रमा में भाग लेने वालों में महिलाओं व बच्चों की संख्या भी काफी अधिक रही। सुरक्षा के इंतजाम जरूर श्रवणक्षेत्र परिसर में चाक चौबंद नजर आए।
उधर जिले में प्रबोधिनी एकादशी पर्व का उल्लास दिखा। मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान श्रीविष्णु अपनी निद्रा का परित्याग कर सृष्टि में नूतन प्राण का संचार करते हैं। जगत पालनहार भगवान श्रीविष्णु की कृपा पाने के लिये लोग देवोत्थानी एकादशी पर व्रत धारण कर गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, पान, सुपाड़ी, ऋतुफल, मिष्ठान आदि अर्पित करते हैं। इसी मान्यता के आधार पर कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान हुए। कहीं श्रद्धालुओं ने सत्यनरायण बाबा की कथा सुनकर प्रसाद का वितरण किया तो कहीं नदियों के विभिन्न पवित्र घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान, पुण्य किया। दूसरी तरफ बाजारों में सिंघाड़ा, गन्ना व शकरकंद की खूब बिक्री हुई। श्रद्धालुओं ने बखूबी परंपरा का निर्वहन किया। टांडा प्रतिनिधि के अनुसार सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान व दान किया। समूचा माहौल भगवान विष्णु व हर हर महादेव के जयकारे से गूंजता रहा। आलापुर, जलालपुर व भीटी आदि तहसील क्षेत्रों में भी प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर कई धार्मिक आयोजन हुए।