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सिर्फ दो दवाओं के सहारे चल रहा जिला अस्पताल, अधिकांश का टोटा

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अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में दवाओं का अकाल पड़ गया है। प्रतिदिन यहां पहुंच रहे 1 हजार से अधिक मरीजों को ऐसे में बाहर से दवाएं खरीदने को विवश होना पड़ रहा। हालत यह है कि प्रत्येक बीमारी की दवा के नाम पर सिप्रो व आयरन की गोली ही थमा दी जाती है। अन्य दवाएं जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। उधर परिसर स्थित प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र से भी मरीजों को मायूसी लग रही है। वहां भी ज्यादातर दवाएं नहीं मिल पा रहीं। नतीजा यह कि सस्से इलाज की आस में यहां आने वाले मरीजों व तीमारदारों को करारा झटका लग रहा है। पेश है अमर उजाला की पड़ताल-
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जिला अस्पताल में मरीजों व उनके तीमारदारों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। स्टाफ व संसाधन की कमी के बीच जिला अस्पताल में दवाओं का भी टोटा बना हुआ है। न तो जिला अस्पताल के औषधि विभाग में दवाएं हैं और न ही परिसर में स्थित प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर। आलम यह है कि बीते लगभग एक पखवारे से जिला अस्पताल में मात्र सिप्रो व आयरन की गोली से ही काम चलाया जा रहा है। पैरासिटामॉल, सिट्रीजिन, खांसी का सीरप, गैस की दवा, कैल्शियम, विटामिन, ब्लड प्रेशर आदि की दवाएं लगभग एक पखवारे से जिला अस्पताल के स्टाक में नहीं हैं। और तो और जिला अस्पताल परिसर में स्थित प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र में भी दवाओं का टोटा है। इक्का-दुक्का दवाएं ही इस केंद्र पर मिल रही हैं। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा मरीजों व उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें ऐसे में मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।

मरीजों व तीमारदारों में दिखी निराशा
बुधवार को जिला अस्पताल में अमर उजाला टीम से मिली कमालपुर निवासिनी सीमा ने कहा कि जिला अस्पताल से उसे मात्र सिप्रो ही मिली है। अन्य दवाएं अब मेडिकल स्टोर से दवा लेने को मजबूर होना पड़ेगा। रिउना निवासी सुरेंद्र ने कहा कि उसकी पत्नी को बुखार है। जिला अस्पताल में दिखाने आए। चिकित्सक ने जो दवाएं लिखी हैं, उनमें से एक भी दवा जिला अस्पताल से नहीं मिली। प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र से भी मात्र एक दवा मिली। शेष दवाएं उसे मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ा। कटरिया की सुनीता व सुड़ारी की अनीता ने कहा कि जिला अस्पताल में दवाओं का टोटा पड़ा हुआ है। यहां मात्र एक सिप्रो ही मिली है। अन्य दवाएं उन्हें बाहर से लेनी पड़ी।
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उपलब्ध कराई जाएं दवाएं
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि मरीजों को सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हो सकें, इसके लिए शासन को गंभीरता दिखानी चाहिए। जिला अस्पताल में ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर मरीज व उनके तीमारदार जाते हैं। ऐसे में जिला अस्पताल से दवा न मिलने पर उन्हें बाहर से महंगी दवा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। कहा कि बढ़-चढ़कर दावे करने में तो शासन-प्रशासन के लोग आगे रहते हैं, लेकिन हकीकत की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता।

भेजी गई है रिपोर्ट
कुछ दवाओं का स्टाक समाप्त हुआ है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। शीघ्र ही दवा उपलब्ध होने की उम्मीद है। जो दवाएं जिला अस्पताल में हैं, उन्हें मरीजों को दी जा रही हैं। -डॉ. एसपी गौतम, सीएमएस
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