अंबेडकरनगर। जिस चालक ने तीन वर्ष पहले अपनी सूझबूझ से बसपा नेता की जान बचाई थी, मालिक के प्रति वफादारी ने सोमवार को उसकी जान ले ली। इस बार बसपा नेता के साथ वह भी मारा गया। चालक की वफादारी की चर्चा तीन साल पहले भी खूब हुई थी और इस बार भी।
तीन वर्ष पहले 2015 में मुंडेरा गांव के निकट बसपा नेता के वाहन पर जब ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी तो उस समय चालक शुभनीत यादव ही था। बसपा नेता का लग्जरी वाहन गोलियाें से छलनी हो गया था। लेकिन चालक ने वाहन को कुछ इस तरह से अचानक घुमाया कि हमलावरों को ही बचने पर मजबूर होना पड़ा।
चालक के तेजी से वाहन घुमाने तथा हमलावरों पर चढ़ाने की कोशिश करने के चलते ही एक बदमाश घायल हो गया था, जिसे लोगों ने पकड़ लिया था। उस घटना में बसपा नेता को सात गोलियां लगी थीं।
इससे ज्यादा चर्चा इस बात की थी कि किस तरह बहादुरी के साथ शुभनीत ने हत्या की पुरजोर कोशिश को टालने में अपनी जान की बाजी लगा दी। इसमें उसे सफलता भी मिली। इस घटना के बाद भयभीत होकर बसपा नेता का साथ छोड़ने की बजाए वह वफादारी के साथ उनके साथ लगा रहा।
शुभनीत की इसी वफादारी के चलते बदमाशों ने इस बार बसपा नेता के साथ उसे भी निशाना बनाया। पिछली बार सिर्फ बसपा नेता के बैठने वाले हिस्से की तरफ से फायरिंग की गई थी, जबकि इस बार चालक को भी निशाना बना लेने की तैयारी थी।
शुभनीत इस बार भी मौत को मात न दे जाए, इसलिए बदमाशों ने बसपा नेता के साथ-साथ वफादारी दिखाने वाले चालक को भी मौत के घाट उतार दिया। सोमवार को लोगाें ने चालक की वफादारी की खूब चर्चा की।