फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

62 विद्यालयों में धूल फांक रहे बच्चों के लिए आए 620 कम्प्यूटर

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। शिक्षक व आपरेटर न होने तथा जनरेटर संचालन के लिए तेल की व्यवस्था न होने से जिले के 62 राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों में 620 कम्प्यूटर कक्ष में पड़े धूल फांक रहे हैं। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा दिए जाने की योजना पूरी तरह धराशायी हो गई। योजना के तहत लगभग चार वर्ष पूर्व जिले के 62 राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों को दस दस कम्प्यूटर उपलब्ध कराए गए थे। शिक्षक व ऑपरेटर के अभाव व जनरेटर में तेल आदि की समुचित व्यवस्था न होने से कुछ ही समय बाद योजना पूरी तरह ठप हो गई। इससे संबंधित विद्यालयों में पढ़ रहे लगभग बीस हजार छात्र-छात्राओं को कम्प्यूटर शिक्षा प्राप्त करने के सपने को ग्रहण लग गया। देखरेख के अभाव में ज्यादातर कम्प्यूटर या तो कक्ष में पड़े धूल फांक रहे हैं, या फिर संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के घर की शोभा बढ़ा रहे हैं।
विज्ञापन

इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं को कम्प्यूटर की शिक्षा प्राप्त हो सके, इसके लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा योजना के तहत लगभग चार वर्ष पूर्व कम्प्यूटर शिक्षा दिए जाने की योजना शुरू की गई। इसके तहत प्रथम चरण में जिले के 64 राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों को चिन्हित किया गया। छात्र-छात्राओं को कम्प्यूटर शिक्षा ग्रहण करने में किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को दस दस कम्प्यूटर उपलब्ध कराया गया। इनके संचालन के लिए प्रारंभिक दौर में एक एक ऑपरेटर की तैनाती करने के साथ ही जनरेटर आदि की भी सुविधा दी गई। कम्प्यूटर शिक्षा पाकर संबंधित विद्यालयों में पढ़ रहे लगभग 20 हजार छात्र-छात्राओं के चेहरे खिल उठे।
हालांकि उनकी खुशी बहुत अधिक दिन तक कायम नहीं रह सकी। समय बीतने के साथ ही उनकी खुशियों को भी ग्रहण लगने लगा। समय पर भुगतान न होने पर एक-एक कर न सिर्फ ऑपरेटर चले गए, बल्कि डीजल की व्यवस्था न होने से जनरेटर भी महज दिखावा बनकर रह गया। नतीजा यह हुआ कि कम्प्यूटर का संचालन पूरी तरह ठप हो गया। मौजूदा समय में देखरेख के अभाव में ज्यादातर कम्प्यूटर कक्षों में पड़े धूल फांक रहे हैं, तो कुछ जगह संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के घर की शोभा बढ़ा रहे हैं। योजना पूरी तरह ठप होने से संबंधित विद्यालयों के छात्र-छात्राएं कम्प्यूटर शिक्षा से वंचित हो गए हैं। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन कभी कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। नतीजा यह कि इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन


गंभीर हों जिम्मेदार अधिकारी
अकबरपुर के अभिभावक राजेंद्र कुमार व सुनील श्रीवास्तव ने कहा कि कम्प्यूटर शिक्षा छात्र-छात्राओं को मिल सके, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को गंभीर होना चाहिए। देखरेख के अभाव में ज्यादातर कम्प्यूटर निष्प्रयोज्य हो चुके हैं। जलालपुर के अभिभावक मोहम्मद हनीफ व टांडा के अरविंद कुमार ने कहा कि सिर्फ कम्प्यूटर विद्यालयों को उपलब्ध कराना ही सबकुछ नहीं है। उसका संचालन सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए भी गंभीरता दिखानी चाहिए।

शासन को दी गई है जानकारी
ऑपरेटरों की संबद्धता समाप्त हो गई थी। इसके चलते ही कम्प्यूटर का संचालन नहीं हो रहा है। इसकी जानकारी शासन को दी गई है। नए सिरे से संबद्धता की प्रक्रिया शुरू है। शीघ्र ही ऑपरेटर संबंधित विद्यालयों में तैनाती हो जाएगी। इसके बाद पुन: कम्प्यूटर का संचालन प्रारंभ हो जाएगा। -विनोद सिंह, डीआईओएस
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें