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बुनकरों की हड़ताल से दो दिन में ठप हुआ ढाई लाख मीटर कपड़े का उत्पादन

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टांडा (अंबेडकरनगर)। धागे के मूल्य में हो रही बेतहाशा वृद्धि को लेकर बुनकरों की हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। लगभग 30 हजार पावरलूमों की खटरपटर ठप होने से दो दिनों में लगभग ढाई लाख मीटर कपड़े का उत्पादन, जबकि 30 टन धागे की बिक्री प्रभावित हुई है। पावरलूमों का संचालन ठप होने से लगभग 70 हजार दैनिक मजदूरों के समक्ष भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उधर बुनकर नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का निस्तारण नहीं हुआ, तो तीन दिवसीय हड़ताल को अनिश्चितकालीन हड़ताल में भी बदला जा सकता है।
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गौरतलब है कि बुनकर एकता विकास समिति के आह्वान पर टांडा के बुनकरों ने तीन दिवसीय हड़ताल कर रखी है। गुरुवार से शुरू हुई हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रही। बताते चलें कि नगरीय व इर्दगिर्द के क्षेत्र में लगभग 30 हजार पावरलूम स्थापित हैं। इनमें इक्कादुक्का को छोड़ दिया जाए, तो ज्यादातर पावरलूमों के पहिए पूरी तरह ठप पड़े हैं। पावरलूमों की खटरपटर ठप होने से दो दिनों में लगभग ढाई लाख मीटर कपड़े का उत्पादन जहां प्रभावित हुआ है, वहीं लगभग 30 टन धागे की बिक्री पर भी प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा संबंधित पावरलूमों से जुड़े लगभग 70 हजार दैनिक मजदूरों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उनका मानना है कि यदि हड़ताल लंबी चली, तो इससे उन्हें बड़ी मुश्किल हो सकती है।
उधर बुनकर एकता विकास समिति अध्यक्ष हाजी मोहम्मद कासिम अंसारी ने हड़ताल को पूरी तरह सफल बताते हुए कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकारें खुद को बुनकरों का हितैषी होने का दावा तो करती हैं, लेकिन इसे जमीनी हकीकत देने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाती। एक उत्पादन, एक जिला योजना के तहत जिले को कपड़ा उद्योग के लिए चुना गया था, लेकिन योजना के तहत अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कहा कि न तो कपड़ा बिक्री केंद्र खोला जा सका है और न ही धागा बिक्री केंद्र की ही स्थापना की जा सकी है। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों का निस्तारण नहीं हुआ, तो हड़ताल अनिश्चितकालीन भी की जा सकती है।
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धागे के बढ़ते दाम ने तोड़ी कमर
बुनकर हाजी गयास अहमद अंसारी ने कहा कि विगत एक माह में धागे के दाम में अप्रत्याशित 65 से 70 रुपये प्रति किग्रा की वृद्धि हुई है। धागे के दाम में तो वृद्धि हो रही है, लेकिन उसके सापेक्ष उत्पादित कपड़े के दाम में वृद्धि नहीं हो रही है। हाजी कफील अहमद अंसारी ने कहा कि जीएसटी लागू होने व धागे के दाम में वृद्धि होने से मौजूदा समय में मंदी चल रही है। इससे कपड़े की बिक्री पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। यदि ऐसा ही रहा, तो मजबूरन पावरलूम बंद करना पड़ेगा। परवेज अंसारी ने कहा कि सरकार ने कपड़ा बिक्री केंद्र खोले जाने का आश्वासन दिया था। अब तक नहीं खोला जा सका है। इससे उत्पादित कपड़ों की बिक्री में समस्या खड़ी हो रही है। नसीम अहमद ने कहा कि एक जिला, एक उत्पादन योजना के तहत जब जिले को कपड़ा उद्योग के लिए चुना गया था, तो बुनकरों में एक नई उम्मीद जगी थी, लेकिन समय बीतने के साथ ही उम्मीदों को झटका लगा है। जुबेर अहमद ने कहा कि कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए यदि शीघ्र ही सरकारें गंभीर नहीं हुईं, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव कपड़ा उत्पादन पर पड़ेगा।
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