अंबेडकरनगर। साढ़े 5 करोड़ रुपये की लागत से दो राजकीय मॉडल स्कूलों का निर्माण कर आधी अधूरी तैयारियों के बीच विद्यालय का संचालन तो कर दिया गया, लेकिन विज्ञान वर्ग के शिक्षकों की तैनाती की सुध नहीं है। आलम यह है कि दोनों विद्यालयों में पंजीकृत कुल 147 छात्र-छात्राओं के लिए विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान व गणित को कोई अध्यापक भही नहीं है। नतीजा यह है कि विज्ञान वर्ग की पढ़ाई न होने से अब संबंधित विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने टीसी कटवाना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं दोनों विद्यालयों में न तो लिपिक की तैनाती है और न ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की। नतीजा यह है कि संबंधित विद्यालयों में साफ-सफाई पूरी तरह बेपटरी होकर रह गई है।
गौरतलब है कि छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा देने के लिए केंद्र सरकार ने मॉडल स्कूल योजना के तहत जिले के चार क्षेत्रों जाफरगंज, पहितीपुर, इधना व रामनगर में राजकीय मॉडल स्कूल की स्थापना को हरी झंडी प्रदान की थी। 2 लाख 75 हजार रुपये की लागत से निर्मित होने वाले प्रत्येक विद्यालयों के सापेक्ष आधी-अधूरी तैयारियों के बीच नए शिक्षासत्र में जाफरगंज व पहितीपुर खजूरडीह में शिक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया गया। बेहतर शिक्षा ग्रहण करने की उम्मीद में दोनों विद्यालयों में ही शुरुआती दौर में कक्षा 6, कक्षा 9 व कक्षा 11 में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने प्रवेश ले लिया। हालांकि समय बीतने के साथ ही आवश्यक सुविधाएं न होने से छात्र-छात्राओं को तगड़ा झटका लगा। दरअसल शिक्षा सत्र के पांच माह से अधिक समय बीतने के बावजूद अब तक विज्ञान वर्ग के शिक्षकों की तैनाती दोनों ही विद्यालयों में नहीं की जा सकी है। नतीजा यह है कि अब छात्र-छात्राओं का संबंधित विद्यालयों से मोहभंग होने लगा है। दोनों विद्यालय से 20 से अधिक छात्र-छात्राओं ने नाम कटवा लिया है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने दोनों विद्यालयों के बारे में जानकारी हासिल की, तो कुछ इस प्रकार चौंकाने वाले तथ्य सामने आए-
केस एक : स्थान- राजकीय माडल स्कूल जाफरगंज
2 करोड़ 75 हजार रुपये की लागत से निर्मित राजकीय मॉडल स्कूल जाफरगंज में प्रधानाचार्य का एक, सहायक अध्यापक पद का 7, प्रवक्ता के 10 पद सृजित हैं। प्रधानाचार्य के अलावा मात्र 4 सहायक अध्यापक व दो प्रवक्ता के पद पर ही तैनाती की जा सकी है। न तो पांच चतुर्थ श्रेणी व दो लिपिक की ही तैनाती की जा सकी है। प्रधानाचार्य प्रभावती ने बताया कि यहां विज्ञान वर्ग का कोई शिक्षक नहीं है। विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान व गणित का कोई शिक्षक न होने से शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बताया कि विद्यालय में कुल 90 छात्र पंजीकृत हैं। इसमें कक्षा 6 में 25, कक्षा 9 में 42 व कक्षा 11 ममें 23 छात्र छात्राएं हैं। कहा कि चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी न होने से अक्सर घंटी लगाने का कार्य वे स्वयं ही करती हैं। रिक्त चल रहे पदों पर तैनाती के लिए कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा सकी।
केस दो : स्थान-राजकीय मॉडल स्कूल पहितीपुर खजूरडीह
इस विद्यालय में भी विज्ञान वर्ग के शिक्षकों की तैनाती न होने से शिक्षण कार्य लगभग पूरी तरह ठप है। यहां प्रधानाचार्य के एक, प्रवक्ता के 10, सहायक अध्यापक के 7, चतुर्थ श्रेणी के 5 व लिपिक के दो पद सृजित हैं। प्रधानाचार्य यदुनाथ ने बताया कि विद्यालय में मात्र दो प्रवक्ता व छह सहायक अध्यापक की ही तैनाती हो सकी है। विज्ञान वर्ग का कोई शिक्षक न होने से कक्षा 6 व 9 की विज्ञान व गणित, तो कक्षा 11 में भौतिक, रसायन व जीव विज्ञान तथा गणित की शिक्षा पूरी तरह ठप है। साफ सफाई के लिए चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी न होने से उन्होंने स्वयं ही व्यवस्था कर 50 रुपये प्रतिदिन की दर से एक महिला को रखा है, जो साफ सफाई का कार्य करती है। रिक्त चल रहे पदों पर तैनाती के लिए डीआईओएस कार्यालय को कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। बताया कि यहां कुल 57 छात्र छात्राएं पंजीकृत हैं। इसमें कक्षा 6 में 25, कक्षा 9 में 21 व कक्षा 11 में 11 छात्र छात्राएं शामिल हैं।
शीघ्र ही आयोग से आएंगे शिक्षक
दोनों राजकीय मॉडल स्कूलों में शिक्षकों, लिपिकों व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जो पद रिक्त हैं, उस पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। शीघ्र ही आयोग से शिक्षकों की तैनाती होने की उम्मीद है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जल्द ही सेवा प्रदाता संस्था से आएंगे। -विनोद कुमार सिंह, डीआईओएस