टांडा/राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। उफनाई सरयू नदी के जलस्तर में मंगलवार को सुबह दो सेमी. की मामूली कमी दर्ज हुई है। नदी का जलस्तर मंगलवार की शाम खतरे के निशान से 55 सेमी. ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया। जलस्तर में विशेष कमी न होने से टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र के 11 पुरवों में अभी भी बाढ़ का पानी भरा है, जबकि लगभग एक दर्जन गांव दो या तीन तरफ से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
दोनों तहसील क्षेत्रों में लगभग तीन हजार बीघा फसल में बाढ़ का लगातार बने रहने से अब फसल के सड़ने की संभावना बढ़ गई है। इससे संबंधित किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उत्पन्न हो गई हैं।
सरयू नदी के उफान में कोई विशेष कमी नहीं आ रही है। सोमवार दोपहर तक जलस्तर खतरे के निशान से 57 सेमी. ऊपर बना हुआ था। मंगलवार को सुबह छह बजे से जलस्तर में कमी शुरू हुई। दोपहर तक दो सेमी की मामूली कमी के बाद नदी खतरे के निशान से 55 सेमी. ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गई।
जलस्तर में हुई मामूली कमी के बावजूद टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र के निकटवर्ती क्षेत्र स्थित प्रभावित गांवों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। टांडा तहसील अंतर्गत माझा उलटहवा के दिलशेर का पूरा, जालिम का पूरा, बाबूराम का पूरा समेत सात पुरवों, जबकि आलापुर तहसील अन्तर्गत अराजी देवारा के कल्लू का पूरा, बद्री का पूरा, सत्यनरायन का पूरा में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इसके अलावा टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र के लगभग डेढ़ दर्जन गांव भी दो या तीन तरफ से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
सरयू नदी के उफान के चलते लगभग तीन हजार बीघा फसल अभी भी पूरी तरह जलमग्र है। इससे फसलों के सड़ने की संभावना बढ़ गई है। प्रभावित किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र ही पानी नहीं हटा, तो फसल बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। इससे न सिर्फ किसानों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलें होंगी, बल्कि मवेशियों के चारे का संकट भी बढ़ जाएगा।
एडीएम गिरिजेश त्यागी ने कहा कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी जाती हैं और उन्हें दूर कराया जा रहा है। कहा कि मवेविशयों के समक्ष चारे का संकट न हो, इसके लिए चारे का वितरण भी समय समय पर कराया जाता है।