टांडा (अंबेडकरनगर)। एनटीपीसी द्वितीय विस्तारीकरण में किसानों की भूमि अधिग्रहण के दौरान राजस्व टीम की मनमानी सामने आई है। किसानों से मिलीभगत कर राजस्व अभिलेखों में पेड़ों का गलत अंकन कर दिया गया। इसके बाद किसान एनटीपीसी पर अधिक मुआवजे के भुगतान का दबाव बनाने लगे।
इसका खुलासा तब हुआ, जब किसान मुआवजे के लिए हाईकोर्ट पहुंचे। बाद में प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में चौंकाने वाला यह मामला सामने आया। इसके बाद अब तहसीलदार टांडा की तहरीर पर इब्राहिमपुर थाने में रजिस्ट्रार कानूनगो व लेखपाल समेत चार किसानों के विरुद्घ केस दर्ज किया गया है।
पिछले वर्ष एनटीपीसी द्वितीय विस्तारीकरण की प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि पर मौजूद परिसंपत्तियों की रिपोर्ट तहसील प्रशासन टांडा द्वारा मांगी गई। राजस्व टीम ने एनटीपीसी को जो रिपोर्ट भेजी, उसमें किसानों से मिलकर व्यापक गड़बड़ी कर दी। बताया जाता है कि जिन खेतों में किसान फसल उगा रहे थे, उसमें पेड़ होने की रिपोर्ट राजस्व टीम ने लगा दी।
कारण यह है कि इससे किसानों को भूमि के साथ ही पेड़ों के नाम पर भी ज्यादा मुआवजा मिलता है। हालांकि एनटीपीसी ने उस समय सिर्फ भूमि का ही मुआवजा दिया। पेड़ों के मुआवजे का भुगतान नहीं किया।
बताया जाता है कि पेड़ों के मुआवजे का लाभ पाने के लिए कुछ किसान हाईकोर्ट चले गए। इस मामले को कोर्ट ने संज्ञान लिया और प्रशासन को निर्देशित किया कि मामले की जांच कर किसानों को उनका हक दिलाया जाए। एसडीएम टांडा के निर्देश पर तहसीलदार टांडा ने बीते दिनों मामले की जांच की तो चौंकाने वाला मामला सामने आया।
जांच में पता चला कि राजस्व टीम द्वारा जिस भूमि पर पेड़ होने की रिपोर्ट दी गई थी, वहां तो किसान फसल का उत्पादन करते थे। संबंधित भूमि पर कोई पेड़ ही नहीं था। मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया। जांच में प्रथम दृष्टया लेखपाल रणधीर सिंह, तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो रामप्रसन्न पाल की भूमिका संदिग्ध मिली। एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार टांडा ने इब्राहिमपुर थाने में इन दोनों के अलावा चार किसानों के विरुद्घ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया गया।