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प्रसिद्ध साहित्य भूषण पुरस्कार के लिए चुने गए कोमल शास्त्री

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अंबेडकरनगर। प्रसिद्ध साहित्यकार रामसहाय मिश्र उर्फ कोमल शास्त्री को प्रतिष्ठित साहित्य भूषण सम्मान के लिए चुना गया है। उन्हें यह सम्मान आगामी दिनों में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समारोहपूर्वक दिया जाएगा। बतौर शिक्षक राष्ट्रपति पुरस्कार समेत उन्हें पहले भी कई प्रमुख सम्मान मिल चुके हैं। 18 अलग-अलग पुस्तकें प्रकाशित होने का श्रेय उन्हें हासिल है।
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जिले के कटघरमूसा कांदीपुर मूल निवासी रामसहाय मिश्र उर्फ कोमल शास्त्री ने एक बार फिर से अपने साहित्य के बूते जिले का मान बढ़ाया है। परिषदीय शिक्षा में रहे कोमल शास्त्री वर्ष 2010 में जूनियर हाईस्कूल अतरौरा से बतौर हेडमास्टर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। 5 अगस्त 1945 को जन्मे कोमल शास्त्री बतौर शिक्षक भी आदर्श प्रस्तुत करने में सफल रहे, जिसके चलते उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। अकबरपुर नगर के शहजादपुर स्थित इंद्रलोक कॉलोनी में लंबे समय से रह रहे रामसहाय मिश्र की कुल 18 किताबें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं। सबसे पहली पुस्तक वर्ष 1963 में वीर रस पर आधारित भारत की संतान शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। हिंदी गजल पर आधारित तुम्हारे शहर में दोहा काव्य पर आधारित प्रतिबिंब, अवधि गजलों पर आधारित माटी बोलैं आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही लगभग डेढ़ दर्जन कृतियां प्रकाशन के लिए भी तैयार हैं।
कोमल शास्त्री को उनके साहित्य क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए ही अब हिंदी संस्थान ने साहित्य भूषण सम्मान देने का निर्णय लिया है। उन्हें यह सम्मान आगामी दिनों में लखनऊ में दिया जाएगा। इससे पहले भी हिंदी संस्थान उन्हें सर्जना सम्मान से सम्मानित कर चुका है। गुजरात सरकार द्वारा भी उन्हें हिंदी भाषा में बेहतर योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। शुक्रवार को सम्मानित होने की जानकारी मिलते ही कोमल शास्त्री भाव विह्वल हो उठे। कहा कि यह उनका नहीं, पूरे जिले का सम्मान है। बकौल कोमल शास्त्री यह पहला मौका होगा, जब जिले के किसी साहित्यकार को साहित्य भूषण पुरस्कार मिलने जा रहा है। उन्होंने युवा पीढ़ी का आह्वान करते हुए कहा कि वह साहित्य के प्रति अपनी रुचि बनाए रखें। खासतौर पर सकारात्मकता तो सबसे ज्यादा जरूरी है।
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