टांडा (अंबेडकरनगर)। ब्लॉक प्रमुख टांडा डॉ. खुशनुमा चौधरी के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गुरुवार को औंधे मुंह गिर पड़ा। बुधवार तक ब्लॉक प्रमुख के विरुद्ध एड़ी-चोटी का जोर लगाने वाले एक भी भाजपा नेता व कार्यकर्ता ब्लॉक के इर्द गिर्द तक नहीं पहुंच सके। कोरम के अभाव में प्रशासन ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को ही निरस्त कर दिया। इससे पहले किसी टकराव को टालने के लिए एडीएम व एएसपी ब्लॉक मुख्यालय पर कई थानों की फोर्स व पीएसी जवानों के साथ मौजूद रहे। इससे पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को खासी फजीहत का सामना करना पड़ा है। सांसद हरिओम पांडेय ने कहा है कि मनमाने ढंग से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।
बसपा से जुड़ी टांडा ब्लॉक प्रमुख खुशनुमा चौधरी के विरुद्ध भाजपा की अगुवाई में अविश्वास प्रस्ताव बीते दिनों लाया गया था। पहले 08 अगस्त को चर्चा तय थी, लेकिन अचानक निरस्त कर दी गई। बाद में 30 अगस्त की तिथि निर्धारित हुई। भाजपा जिलाध्यक्ष कपिलदेव वर्मा व अन्य ने इसे चुनौती के रूप में लिया था। जिसके चलते ब्लॉक प्रमुख के पक्ष में पूर्व मंत्री लालजी वर्मा को स्वयं कमान संभालनी पड़ी थी। बुधवार को इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र में तनातनी के बीच बसपा व भाजपा समर्थक आपस में भिड़ भी गए थे। पुलिस प्रशासन को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। माहौल को देखते हुए गुरुवार को प्रशासन ने टांडा ब्लॉक मुख्यालय पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध के बीच अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू कराई।
एसडीएम पंकज सिंह की मौजूदगी में पूर्वान्ह 11 बजे से सदस्यों का इंतजार किया जाता रहा, लेकिन निर्धारित समय दोपहर 12 बजे तक ब्लॉक प्रमुख के विपक्ष में कोई भी सदस्य उपस्थित नही हुआ। कुल 136 सदस्यों वाले सदन में सिर्फ 2 सदस्य लवकुश वर्मा व सुरजीत वर्मा ही वहां पहुंचे। यह दोनों ब्लॉक प्रमुख के समर्थन में थे। ऐसे में कोरम के अभाव में अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। एसडीएम पंकज सिंह ने गुरुवार शाम बताया कि कोरम के अभाव में अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया निरस्त की गई है।
अधिकारियों का रहा जमावड़ा
अविश्वास प्रस्ताव पर किसी टकराव को टालने के लिए एडीएम गिरिजेश त्यागी एएसपी ओपी सिंह के साथ एसडीएम टांडा पंकज सिंह, सीओ केके मिश्र, सीओ भीटी बीके श्रीवास्तव, सीओ जलालपुर अमरबहादुर लगातार डटे रहे। आधा दर्जन थानों की फोर्स के अलावा महिला थाना प्रभारी भी महिला पुलिस कर्मियों के साथ डटी रही। सिविल पुलिस के साथ ही पीएसी की भी तैनाती की गई थी। प्रवेश द्वार पर सघन सुरक्षा जांच के साथ ही अंदर संबंधित कक्ष के प्रवेश द्वार पर दोहरी जांच की व्यवस्था थी। परिसर के अंदर व बाहर ऐसे सुरक्षा प्रबंध किए गए थे, जिससे किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। दंगा नियंत्रण की टीम को भी तैयार रखा गया था।