टांडा (अंबेडकरनगर)। सरयू नदी के जलस्तर में मंगलवार को वृद्धि होने से सोमवार के सापेक्ष चार सेमी. बढ़कर खतरे के निशान से 52 सेमी. ऊपर पहुंच गई। इससे माझा उलटहवा के बाबूराम का पूरा, जालिम का पूरा, कुसमौलिया, दिलशेर का पूरा समेत सभी सात पुरवों की आबादी तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
नदी की दो धाराओं के बीच स्थित माझा कला में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। इसके अलावा नाले के माध्यम से नगर के आधा दर्जन मोहल्लों की गलियां भी बाढ़ के पानी से भर गई हैँ। महादेवा व हनुमानगढ़ी घाट की सीढ़ियां भी जलमगभन हो गईं। महादेवा घाट पर पूर्व में की गई बैरीकेडिंग के क्षतिग्रस्त हो जाने के चलते नए सिरे से बैरीकेडिंग का कार्य प्रारंभ हो गया है।
उफनाई सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि का दौर लगातार जारी है। सोमवार शाम छह बजे जलस्तर खतरे के निशान 92.73 मीटर से 48 सेमी. ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया था। मध्यरात्रि के बाद एक बार फिर से जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई। मंगलवार शाम पांच बजे जलस्तर सोमवार के सापेक्ष चार सेमी बढ़कर खतरे के निशान से 52 सेमी. ऊपर पहुंच गया।
नतीजा यह हुआ कि माझा उलटहवा के बाबूराम का पूरा, जालिम का पूरा, कुसमौलिया, दिलशेर का पूरा समेत सभी सात पुरवों में बाढ़ का पानी घुस गया। इन पुरवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूटने के चलते ग्रामीणों को आवागमन में कोई परेशानी न हो, इसके लिए कुल 14 नावें लगाई हैं। इसके अलावा माझा कला में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया। नाले से होता हुआ बाढ़ का पानी नगर के मोहल्ले मेहनिया, नेहरूनगर, छज्जापुर, कश्मीरिया नई बस्ती, तलवापार, मुसहां आदि की गलियों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
उधर, हनुमानगढ़ी व महादेवा घाट की सीढ़ियां बाढ़ के पानी से पूरी तरह जलमगभन हो गई हैं। किसी भी हादसे से बचने के लिए महादेवा घाट पर बीते दिनों बैरीकेडिंग की गई थी, जो क्षतिग्रस्त हो गई थी। उसे नए सिरे से ठीक कराया जा रहा है। जलस्तर में हुई वृद्धि से निकटवर्ती क्षेत्र की लगभग 1500 बीघा फसल पूरी तरह जलमगभन हो गई। इससे संबंधित क्षेत्र के मवेशियों के समक्ष चारे का संकट खड़ा हो गया है।
वर्जन
जलस्तर पर रखी जा रही नजर
सरयू नदी के जलस्तर पर लगातार निगाह रखी जा रही है। अभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की जरूरत नहीं है। मवेशियों के चारे का संकट दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाया जा रहा है।
- पंकज सिंह, एसडीएम