अंबेडकरनगर। बारिश न होने के चलते जिले में सूखे के हालात पैदा हो रहे हैं। एक तरफ जहां जलस्तर गिरने से पेयजल का संकट खड़ा हो गया है तो वहीं किसानों के सामने सिंचाई की समस्या मुंह बाये खड़ी है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जुलाई में अब तक मात्र 120.06 मिमी ही वर्षा हो सकी है, जबकि जुलाई माह में सामान्य वर्षा 293.36 मिमी है। इससे पहले के माह में भी औसत से काफी कम बरसात हुई है। समुचित बारिश न होने से धान की रोपाई का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बारिश न होने, ज्यादातर सरकारी नलकूप खराब होने तथा माइनरों व रजबहों में पानी न होने का नतीजा है कि जिले में अब तक मात्र साढ़े 22 हजार हेक्टेअर क्षेत्र में ही धान की रोपाई हो सकी है, जबकि 1 लाख 12 हजार 387 हेक्टेअर क्षेत्रफल में खरीफ की बुआई का लक्ष्य है। सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने से धान किसानों के समक्ष विभिन्न प्रकार की मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।
माह दर माह बारिश कम होने से जिला तेजी के साथ सूखे की तरफ बढ़ रहा है। समुचित बारिश न होने से अब किसानों व अन्य लोगों द्वारा जिले को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की आवाज बुलंद होने लगी है। लगातार कम हो रही बारिश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मई में सामान्य वर्षा 21.61 मिमी के सापेक्ष मात्र 1 मिमी ही बारिश हुई, जबकि जून में सामान्य 168.6 मिमी बारिश के सापेक्ष 58.6 मिमी ही बारिश हुई। जुलाई में वैसे तो सामान्य बारिश 293.36 मिमी सामान्य वर्षा है, लेकिन 18 जुलाई तक मात्र 120.06 मिमी ही बारिश हुई है। आपदा विभाग के अनुसार विगत वर्ष मई में 36.5 मिमी, जून में 54.5 मिमी व जुलाई में 427 मिमी वर्षा हुई थी।
समुचित बारिश न होने से धान की रोपाई का कार्य का बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। साधन संपन्न किसान तो किसी प्रकार वैकल्पिक व्यवस्था कर धान की रोपाई कर रहे हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के समक्ष व्यापक मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। सिंचाई की कमी होने का ही नतीजा है कि अब तक मात्र 22 हजार 447.20 हेक्टेअर क्षेत्रफल में ही धान की रोपाई हो सकी है। ऐसा तब है कि जबकि जिले को 1 लाख 12 हजार 387 हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान रोपाई का लक्ष्य है। आमतौर पर अगस्त के प्रथम सप्ताह तक ही धान की रोपाई होती है। ऐेसे में अब तक लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्रफल में धान की रोपाई हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक महज 20 प्रतिशत खेतों में ही धान की रोपाई हो पाई है। उप कृषि निदेशक रामदत्त बागला ने बताया कि बारिश न होने के चलते ही धान की रोपाई का कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा है।
किसानों का साथ नहीं दे रहे 42 नलकूप
नलकूप विभाग के अनुसार जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 494 नलकूपों की स्थापना है। इसमें 17 नलकूल ऐसे हैं, जिनके मोटर लंबे समय से खराब पड़े हैं, जबकि 25 नलकूप के मोटर लो वोल्टेज के चलते कार्य नहीं कर रहे हैं। यह आंकड़ा सरकारी है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं परे है। 100 से अधिक नलकूप विभिन्न कारणों से किसानों का साथ नहीं दे रहे। इसके चलते किसानों के समक्ष सिंचाई का संकट और भी बढ़ गया है। अधिशाषी अभियंता नलकूप कमलेश कुमार ने बताया कि जो नलकूप खराब हैं, उन्हें शीघ्र ही ठीक कराया जाएगा।
किसान बोले, सूखा घोषित हो जिला
अमेदा के किसान गिरीश तिवारी ने कहा कि एक तरफ बारिश नहीं हो रही, उस पर से माइनर में पानी नहीं है। माइनर व रजवाहे में पानी डाले की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। मोती का पूरा निवासी ओमप्रकाश ने कहा कि सिंचाई को लेकर किसान परेशान है। रोपाई का कार्य आगे नहीं बढ़ रहा है। जिन्होंने रोपाई की भी है, उनके समक्ष उसे बचाए रखने की चिंता है। इसके बावजूद प्रशासन उनकी समस्या के निस्तारण को लेकर कदम नहीं उठा रहा। समैसा खानपुर के अंगद पाल ने कहा कि राजकीय नलकूप लंबे समय से खराब है। माइनर में पानी नहीं। बारिश हो नहीं रही। ऐसे में वे अब तक धान की रोपाई नहीं कर पा रहे। अटंगी के अनिल कुमार व सरैया के परशुराम ने कहा कि जिला तेजी से सूखे की तरफ बढ़ रहा है। बारिश न होने को देखते हुए अब तक तो जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया जाना चाहिए।