अंबेडकरनगर। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में एनसीईआरटी पुस्तकें की बिक्री दुकानदारों द्वारा निर्धारित दर से अधिक दाम पर किए जाने का मामला सामने आया है। किसी पुस्तक पर 10 रुपये, तो किसी पर 15 रुपये अधिक लिए जा रहे हैं। दुकानदारों द्वारा छात्र-छात्राओं को पुस्तक के साथ-साथ उत्तर पुस्तिकाएं लेने पर भी मजबूर किया जा रहा है। इससे छात्र छात्राओं व उनके अभिभावकों को आर्थिक चपत लग रही है। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार का अभियान नहीं चलाया जा सका है। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा छात्र छात्राओं व उनके अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होने से पहले शासन के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा नौ से कक्षा 12 तक की कक्षाओं में एनसीईआरटी पुस्तकें लागू करने की घोषणा की थी। यह पुस्तकें उत्तर प्रदेश एनसीईआरटी के नाम से बाजार में पहुंच गईं। शुरुआत में तो इन पुस्तकों का दुकानों पर मिलना ही दूभर था, लेकिन बाद में उपलब्ध हो गईं। दुकानदारों द्वारा इन पुस्तकों को निर्धारित दाम से अधिक दाम में बेचा जाने लगा। ज्यादातर पुस्तकों की एमआरपी 60 रुपये है। दुकानदारों द्वारा यह पुस्तकें 70 रुपये से 75 रुपये में बेची जा रही हैं। इतना ही नहीं, दुकानदारों द्वारा पुस्तकों के साथ उत्तर पुस्तिकाएं या फिर गाइड लेने के लिए भी छात्र-छात्राओं को मजबूर किया जा रहा है। यदि कोई छात्र या फिर उनके अभिभावक इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें पुस्तक ही नहीं दी जाती।
कभी-कभी तो अभिभावकों व दुकानदारों के बीच कहासुनी हो जाती है। अकबरपुर के श्रीराम ने कहा कि गत दिवस वह कक्षा 10 की विज्ञान की पुस्तक लेने के लिए शहजादपुर स्थित एक दुकान पर गए, तो उसने पुस्तक के साथ 100 रुपये की गाइड थमा दिया। कहा कि बगैर गाइड के पुस्तक नहीं दी जाएगी। जब विरोध किया, तो पुस्तक देने से इन्कार कर दिया। मीरानपुर के शहनवाज व जलालपुर के नीरज ने कहा कि पुस्तक का दाम 60 रुपये है, लेकिन दुकानदार द्वारा 75 रुपये लिया गया। छात्रा सरिता व सौम्या ने कहा कि जब उसने निर्धारित दाम पर पुस्तक लेने की जिद की, तो दुकानदार ने पुस्तक रख कर वापस जाने को कहा। बाद में मजबूरन 10 रुपये अधिक देकर पुस्तक लेनी पड़ी। अभिभावक दीप कुमार, सुरेश कुमार, इश्तियाक, रईस अहमद, वरुण सिंह ने कहा कि इसकी शिकायत कई बार डीआईओएस से की गई, लेकिन अब तक इसे लेकर किसी भी प्रकार का अभियान नहीं चलाया जा सका। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा छात्र छात्राओं व उनके अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है।
दुकानदारों का अपना अलग है तर्क
पुस्तक विक्रेता श्यामजी ने कहा कि सरकार पुस्तकों पर किसी भी प्रकार का कमीशन नहीं है। यदि किसी भी प्रकार का लाभ न हो, तो व्यवसाय किस प्रकार करें। कैसे घर का खर्च चलेगा। इसी के चलते पुस्तक के साथ उत्तर पुस्तिकाएं या फिर गाइड दी जाती हैं। शहजादपुर के दुकानदार मनोज व टांडा के पुस्तक व्यवसायी अमजद ने कहा कि पहले निजी पुस्तकें चलती थीं, तो उस पर कुछ लाभ हो जाता था। अब एनसीईआरटी पुस्तकें लग गई हैं। इस पर सिर्फ 50 पैसे का लाभ है। अब इतने कम लाभ पर बिजनेस तो किया नहीं जा सकता। इसी के चलते 10 से 15 रुपये अधिक लिए जाते हैं।
शीघ्र चलेगा अभियान
निर्धारित दाम से अधिक दाम पर एनसीईआरटी पुस्तकों की बिक्री किए जाने जैसी कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसा है, तो शीघ्र ही अभियान चलाकर जांच की जाएगी। यदि मामला सही पाया गया, तो संबंधित दुकानदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। -विनोद सिंह, डीआईओएस