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अंग्रेजी शिक्षा के नाम पर मजाक, किताबें तक उपलब्ध नहीं

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अंग्रेजी शिक्षा के नाम पर सात हजार छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
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शिक्षा सत्र के चार माह बाद भी बच्चों को किताबें तक नहीं मिलीं
इंग्लिश मीडियम के 50 परिषदीय स्कूलों का हाल


अंबेडकरनगर। परिषदीय विद्यालयों में इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई के नाम पर छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। कॉन्वेंट विद्यालयों की बराबरी करने के लिए जिले के 50 परिषदीय विद्यालयों को इंग्लिश मीडियम में परिवर्तित किया गया। इंग्लिश मीडियम के नाम में संबंधित विद्यालयों में सात हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रवेश भी ले लिया। मगर नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हुए लगभग चार माह बीत गए, लेकिन अब तक न तो इन इन स्कूलों मेें पुस्तकें पहुंच सकीं और न ही ड्रेस। नतीजा यह है कि प्रतिदिन संबंधित विद्यालयों में छात्र-छात्राएं बगैर ड्रेस के सिर्फ कॉपियां लेकर जाते हैं और बगैर किसी प्रकार की शिक्षा ग्रहण किए घर लौट जाते हैं। पुस्तकें न पहुंचने से कोर्स पिछड़ रहा है, इसका सीधा प्रभाव आने वाले दिनों में शिक्षण कार्य पर पड़ेगा।
गौरतलब है कि कॉन्वेंट विद्यालयों की तरह परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को सुविधाएं देने के लिए सर्वशिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार ने परिषदीय स्कूलों को भी इंग्लिश मीडियम में परिवर्तित करने का निर्णय लिया था। प्रथम चरण में वर्ष 2017-18 में जिले के दो विद्यालय प्राथमिक विद्यालय अफजलपुर व प्राथमिक विद्यालय अकबरपुर को इंग्लिश मीडियम में परिवर्तित किया गया। इसके बाद वर्ष 2018-19 में सोनगांव, पसियापारा, शिवबाबा, भड़सार, बरियावन, बंदीपुर, बसखारी, हरैया, अरगूपुर मिश्रौलिया समेत कुल 48 विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दिए जाने का निर्णय लिया गया। इंग्लिश मीडियम के नाम पर संबंधित विद्यालयों में सात हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रवेश करा लिया। अभिभावकों को इस बात की खुशी हुई कि बगैर भारी भरकम फीस दिए उनके बच्चे भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे।
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हालांकि समय बीतने के साथ ही उनकी खुशी काफूर होती गई। कारण यह कि नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हुए लगभग चार माह बीतने को हैं, लेकिन अब तक संबंधित विद्यालयों में केंद्र सरकार पुस्तकें उपलब्ध नहीं करा सकी है। इसके अलावा उन्हें ड्रेस भी नहीं मिल सकी है। नतीजा यह है कि प्रतिदिन सुबह बगैर ड्रेस में ही छात्र-छात्राएं बैग में कॉपियां रखकर विद्यालय जाते हैं, लेकिन पुस्तकें न होने से बगैर कोर्स पढ़े ही छात्र-छात्राओं को मायूस होकर घर लौटने को मजबूर होना पड़ता है।


इंसेट
पिछड़ रहा कोर्स
अभिभावक रामफेर व सतीश कुमार ने कहा कि पुस्तकें न उपलब्ध होने के चलते कोर्स पिछड़ता जा रहा है। चार माह बीतने को हैं, लेकिन अब तक सरकार पुस्तकें नहीं उपलब्ध करा सकी है। मोहम्मद अमीन व अभिषेक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सिर्फ विद्यालय के बाहर इंग्लिश मीडियम का बोर्ड लगा देना बड़ी बात नहीं है। आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर भी गंभीरता दिखानी चाहिए। अभी तक न तो नौनिहालों को पुस्तकें उपलब्ध हो सकी हैं और न ही ड्रेस।
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वर्जन
शासन को भेजा गया है पत्र
जिले में 50 परिषदीय विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किया गया है। इन विद्यालयों में अब तक पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। छात्र-छात्राओं को जल्द से जल्द पुस्तकें उपलब्ध हो सकें, इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
- अतुल कुमार सिंह, बीएसए
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