एंकर : विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष : प्रचार-प्रसार के अभाव में लोगों को नहीं मिल पाती योजनाओं की जानकारी
हेडिंग : जनसंख्या नियंत्रण को लेकर लापरवाह स्वास्थ्य विभाग
जिले में एक दशक में बढ़ी तीन लाख 71 हजार आबादी
अंबेडकरनगर। एक दशक में जिले की आबादी करीब तीन लाख 71 हजार बढ़ गई। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं व जागरूकता अभियान के बावजूद इस पर रोक नहीं लग पा रही है। बढ़ती जनसंख्या का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2001 में हुई जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 20 लाख 26 हजार 876 थी, जबकि वर्ष 2011 में हुई जनगणना में जिले की आबादी बढ़कर 23 लाख 97 हजार 888 हो गई।
11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस है। इसे लेकर जिले में महज औपचारिकता ही निभाई जाएगी। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में इनकी समुचित जानकारी लोगों को नहीं मिल पा रही है। जागरूकता की कमी का ही नहीं नतीजा है कि एक दशक में जिले की आबादी करीब तीन लाख 71 हजार बढ़ गई। अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के अनुसार वर्ष 2001 में जिले की जनसंख्या 20 लाख 26 हजार 876 थी। इसमें 10 लाख 24 हजार 953 पुरुष, जबकि 10 लाख 1 हजार 923 महिलाएं शामिल थीं। इस प्रकार पुरुष के सापेक्ष 23 हजार 30 महिलाएं कम थीं। वर्ष 2011 में जिले की जनगणना 23 लाख 97 हजार 888 हो गई। इसमें पुरुषों की संख्या 12 लाख 12 हजार 410, जबकि महिलाओं की संख्या 11 लाख 85 हजार 478 शामिल रही। इस प्रकार इस जनगणना में महिलाओं की संख्या पुरुषों के सपेक्ष 26 हजार 932 कम थी।
विभाग के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की कुल आबादी 21 लाख 17 हजार 158 थी। इसमें 10 लाख 67 हजार 762 पुरुष व 10 लाख 49 हजार 396 महिलाएं शामिल रहीं। इस प्रकार पुरुष व महिलाओं की जनसंख्या में 18 हजार 366 का अंतर था। शहरी क्षेत्र की आबादी 2 लाख 80 हजार 730 थी। इसमें पुरुषों की संख्या 1 लाख 44 हजार 647 व महिलाओं की संख्या 1 लाख 36 हजार 82 थी। दोनों की जनसंख्या में 8 हजार 566 का अंतर रहा।
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नसबंदी को लेकर नहीं दिखाई गई जागरूकता
स्वास्थ्य विभाग की ओर से नसबंदी को लेकर लंबे समय से जिले में किसी भी प्रकार का अभियान नहीं चलाया गया। नतीजा यह है कि नसबंदी को लेकर लक्ष्य काफी दूर है। सीएमओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 11 हजार प्रतिवर्ष नसबंदी का लक्ष्य जिले को है। जागरूकता के अभाव के चलते लक्ष्य की पूर्ति की बात तो दूर, उसके निकट भी नहीं पहुंच सका। और तो और नसबंदी कराने में पुरुषों के सापेक्ष महिलाएं अधिक जागरूक दिखीं। सीएमओ कार्यालय के अनुसार वर्ष 2016 में जिले में 1651 नसबंदी हुई। इसमें छह पुरुष, जबकि 1645 महिलाएं शामिल रहीं। वर्ष 2017 में 997 नसबंदी में 12 पुरुष व 945 महिलाएं रहीं। वर्ष 2018 में कुल 1741 नसबंदी हुई। इसमें 1737 महिलाएं, जबकि 4 पुरुष शामिल रहे।
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सारथी वाहन से हो रहा प्रचार
सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक हनुमान प्रसाद ने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर संचालित हो रहीं योजनाओं के समुचित प्रचार-प्रसार के लिए सारथी वाहन का सहारा भी लिया जा रहा है। इस वाहन द्वारा गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा समय-समय पर गोष्ठी का आयोजन कर लोगों को जनसंख्या नियंत्रण व परिवार नियोजन के बारे में जानकारी भी दी जाती है।
वर्जन
समय-समय पर चलाया जाता है अभियान
जनसंख्या नियंत्रण के प्रति लोगों को जागरूक करने व परिवार नियोजन के बारे में समय-समय पर अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाता है। इसके लिए धर्मगुरुओं व ग्राम प्रधान के साथ समय-समय पर बैठक भी की जाती है। जागरूकता के आधार पर ही जनसंख्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
- डॉ. सालिकराम पासवान, प्रभारी सीएमओ