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बारिश न होने से सूखे की तरफ तेजी से बढ़ रहा जिला

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अंबेडकरनगर। बारिश न होने से जिले में हाहाकार की स्थिति है। हालात तेजी से सूखे की तरफ बढ़ रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक जल स्तर इस तरह गिरा है कि हैंडपंपों से लेकर सामान्य बोरिंग पर विद्युत मोटर के सहारे भी पानी निकलना लगातार कम हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि मई से ही औसत से काफी कम बारिश जिले में हुई है। इससे फसलें सूखने लगी हैं। मई में 20.61 मिमी तो जून में 109.46 मिमी बारिश कम हुई। जुलाई में गत वर्ष 6 जुलाई तक 158.05 मिमी बारिश हुई थी, लेकिन इस बार 6 जुलाई तक मात्र 25.0 मिमी बारिश ही हुई। ऐसे में माना जा रहा कि यदि आने वाले दिनों में ठीक से बारिश नहीं हुई, तो जिला सूखे की चपेट में चला जाएगा।
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मौसम विभाग ने बरसात का मौसम प्रारंभ होने से पहले भविष्यवाणी की थी कि इस बार अच्छी बारिश होगी। समय पर मानसून भी आएगा। इससे लोगों के चेहरे खिल गए थे, क्योंकि गत वर्ष भी बारिश ठीक से नहीं हुई थी। इसके चलते गर्मी शुरू होने के साथ ही जल स्तर में कमी आने तथा पेयजल संकट का सिलसिला शुरू हो गया था। मई में सामान्य वर्षा नहीं हुई तो लोगों को उम्मीद थी कि जून में ऐसा नहीं होगा। आमतौर पर जून में लोगों को बेहतर बारिश की उम्मीद थी हालांकि समय बीतने के साथ ही विभाग की सभी भविष्यवाणी हवा हवाई साबित होने लगी। माह दर माह बारिश में कमी होती गई। नतीजा यह है कि पूरा जिला तेजी से सूखे की चपेट की तरफ बढ़ रहा है। हालात लगातार गंभीर हो रहे हैं।
कलेक्ट्रेट स्थित आपदा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष मई में मात्र 1 मिमी बारिश हुई है, जबकि पूरे माह की सामान्य वर्षा 21.61 मिमी है। गत मई में औसत से ज्यादा 36.5 मिमी बरसात हुई थी। जून में सामान्य वर्षा 168.06 मिमी होनी चाहिए, लेकिन इस वर्ष जून में कुल बरसात सिर्फ 58.6 मिमी हुई। ऐसे में सामान्य वर्षा से 109.46 मिमी कम बारिश हुई। इसका सीधा खामियाजा जिले के जल स्तर पर भी पड़ा। गत वर्ष जून में 54.5 मिमी बरसात हुई थी। गत वर्ष 6 जुलाई तक जिले में 158.05 मिमी वर्षा हुई थी, जबकि इस वर्ष 6 जुलाई तक मात्र 25.0 मिमी ही वर्षा हुई है। गत वर्ष जुलाई में कुल 427 मिमी वर्षा हुई थी, जो कि सामान्य वर्षा 293.36 मिमी से काफी अधिक थी। इन आंकड़ों से भी स्पष्ट है कि जिले में जिस प्रकार से बारिश अब तक औसत से भी कम बारिश हुई है, उससे हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।
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किसानों के सामने बढ़ी समस्या
इस बार बारिश कम होने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उत्पन्न हो गई हैं। दरअसल मौजूदा समय में धान की बेरन तैयार हो चुकी है। रोपाई का कार्य भी कुछ स्थानों पर प्रारंभ कर दिया गया है। इसके लिए खेतों में पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है। अकबरपुर के किसान सालिकराम व रामकेश शर्मा ने कहा कि बीते कुछ वर्षों से समुचित बारिश न होने से जलस्तर नीचे चला गया है। इससे सामान्य ट्यूबवेल ने काम करना या तो बंद कर दिया है या फिर कम पानी आ रहा है। इससे रोपाई के लिए सिंचाई कर पाना कठिन हो रहा है। किसान जियाराम व दिलीप वर्मा ने कहा कि बारिश न होने व सामान्य ट्यूबवेल द्वारा समुचित पानी न देने से रोपाई के लिए खेत तैयार नहीं हो पा रहा है। सिर्फ साधन सम्पन्न मात्र दो प्रतिशत लोग ही रोपाई का कार्य अब तक प्रारंभ कर सके हैं। यदि बारिश नहीं होती है, तो धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

फूलों व सब्जी की खेती पर भी पड़ रहा प्रभाव
फूलों की खेती करने वाले बनगांव रोड निवासी अच्छेलाल सोनकर व कसेरुआ के जंगबहादुर वर्मा ने कहा कि बारिश न होने के चलते गेंदे के फूल बड़े नहीं हो रहे हैं। ऐसे में उनकी खूबसूरती व वजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यदि पानी की समस्या इसी प्रकार से आगे भी बनी रही, तो आने वाले समय में फूलों की खेती करने वाले किसानों को व्यापक मुश्किलें उठानी पड़ेगी। लागत तक निकालना कठिन हो जाएगा। सब्जी व्यवसाई मितई सोनकर ने कहा कि बरसात में उगाई जाने वाली सब्जी बारिश न होने से तैयार नहीं हो रही है। कहा कि नेनुआ, तरोई, सरपुतिया, बण्डा, अरुई जरैसी सब्जी की खेती करने वाले किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है। अरुई की खेती करने वाले गंगाराम राजभर ने कहा कि उसने तीन बिस्वा में अरुई की खेती किया था। यदि समुचित बारिश होती, तो 20 से 25 हजार रुपये का लाभ होता। बारिश न होने से लागत निकालना मुश्किल है।

किसानों की होगी सभी मदद
जिले में सामान्य से कम बरसात पिछले दो माह से हुई है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्हें बस सावधानी बरतना होगा। आने वाले दिनों में बरसात ठीक होने से सभी स्थिति सुधर जाएगी। -रामदत्त बागला, उपकृषि निदेशक
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