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कल से बंद हो जाएगा नदी घाटों पर बालू खनन, दाम में उछाल की आशंका

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अंबेडकरनगर। शासन के निर्देशानुसार आगामी एक जुलाई से जिले में बालू खनन का कार्य तीन माह के लिए बंद हो जाएगा। इससे पक्का आवास बनवाने की तैयारी में जुटे लोगों को अपनी जेबें और ढीली करनी पड़ेगी। यह बात अलग है कि प्रशासन मूल्य में वृद्धि रोकने के लिए आवश्यक स्टॉक रखने का दावा कर रहा है। विभाग ने 10 अलग अलग स्थानों पर लगभग ढाई लाख घन मीटर बालू डंप करने की बात स्वीकार की है। विभाग का कहना है कि घाटों से खनन बंद होने पर इसी डंप बालू की सप्लाई जिले में हो सकेगी। घाटों पर किसी भी दशा में तीन माह तक खनन का कार्य नहीं होगा।
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गौरतलब है कि बरसात के मौसम में नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। बाढ़ की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। इससे नदी के आस पास के रिहायसी इलाकों में स्थिति अत्यंत भयावह हो जाती है। बाढ़ की इस भयावह स्थिति को रोकने के लिए शासन ने गंभीरता से लिया है। जिन जनपदों में बालू या फिर मोरंग की खनन नदी क्षेत्र से होती है, वहां के जिलाधिकारी व जिला खनन अधिकारी को पत्र जारी कर आगामी 1 जुलाई से 30 सितंबर तक नदी क्षेत्र से किसी भी प्रकार के खनन को रोकने का निर्देश दिया गया है। कहा गया कि संबंधित अवधि में वैध पट्टाधारक भी कोई खनन नहीं करेंगे। शासन के इस पत्र के बाद खनन विभाग ने आवश्यक तैयारियां तेज कर दी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो खनन बंद रहने की अवधि में सफेद बालू के दाम में बढ़ोत्तरी न हो इसके लिए विशेष प्रबंधन किया गया है। अलग अलग व्यक्ति के नाम से अलग अलग स्थान पर लगभग ढाई लाख घन मीटर बालू डंप की गई है। खनन कार्य बंद होने के बाद इसी बालू की सप्लाई जिले में हो सकेगी।
एक जुलाई से जिले में सफेद बालू खनन का कार्य बंद होने की दशा में पक्का मकान बनाने की तैयारी में जुटे लोगों को तगड़ा झटका लगने वाला है। लोगों का मानना है कि नदियों से मोरंग व बालू का खनन बंद होने से इनके दाम में तेजी से उछाल होने की पूरी संभावना है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा, जो पक्का मकान बनवाने की तैयारी में है। मौजूदा समय में जो सफेद बालू 15 से 20 रुपये फुट मिल रही है, उसी बालू का दाम खनन बंद होने पर 25 से 30 फुट होने की आशंका है। इसी तरह मोरंग का दाम जहां मौजूदा समय में 80 से 85 रुपये बिक रहा है, वहीं इसके 100 से 110 रुपये पहुंचने की संभावना है। खनन बंद होने की सूचना के बाद से आम लोगों में काफी ऊहापोह की स्थिति है।
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इन घाटों हो रहा बालू खनन
जिले के सरयू नदी के चार घाटों पर बालू खनन का कार्य टेंडर के आधार पर चल रहा है। इसमें बालू खनन के लिए टांडा तहसील के मांझा सलारपुर, इस्माइलपुर बेल्दहां, वर्जी निजामपुर व ककराही शामिल है। सूत्रों की मानें तो ककराही घाट पर खनन का कार्य करा रही ठेकेदार नीलम सिंह ने बीते दिनों ही खनन कराने की बजाय सरेंडर प्रार्थना पत्र दे दिया था। कृषि पट्टे के लिए आवंटित अवसानपुर, करमपुर बरसावां व तिलकारपुर, आलापुर तहसील क्षेत्र के मांझा कम्हरिया क्षेत्र में तीन स्थानों पर कृषि पट्टों का आवंटन किया गया था। इसमें एक किसान द्वारा पूर्व में ही सरेंडर किया जा चुका है। जबकि बीते दिनों एक कृषि पट्टे पर मननाने तरीके से खनन की सूचना पर एसडीएम व सीओ की संयुक्त टीम ने पट्टे को सीज कर दिया था। एक अन्य कृषि पट्टे पर सामान्य खनन का कार्य चल रहा है।

10 स्थानों पर है रखा गया बालू का स्टॉक
खनन विभाग ने घाटों के बंद होने की दशा में सफेद बालू का संकट व दाम में बढ़ोत्तरी न हो इसके लिए 10 स्थानों पर बालू डंप किया है। इसमें आलापुर तहसील के वशिष्ठ पाण्डेय के नाम से चाड़ीपुर कला व चाड़ीपुर खुर्द में, रवींद्र यादव के नाम से गोवर्धनपुर में, कोदई सिंह के नाम से हुसैनपुर कला में, सुधीर सिंह के नाम से साबितपुर में बालू का स्टाक बनाया गया है। टांडा तहसील में रवीन्द्र यादव के नाम से आसोपुर में, तेजप्रताप सिंह के नाम से हुसैनपुर सुधाना, अतुल सिंह के नाम से हुसैनपुर सुधाना, गौरव सिंह के नाम से रामपुर बेनीपुर, आदित्य के नाम से आमडीह में बालू का स्टॉक रखा गया है।

नहीं होने पाएगी दिक्कत
आम लोगों के हितों को देखते हुए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। अलग-अलग स्थानों पर ढाई लाख घन मीटर बालू डंप किया गया है। एक जुलाई से 30 सितंबर तक खनन का कार्य बंद रहेगा। इस अवधि में नदी के घाटों से किसी प्रकार का खनन नहीं होने पाएगा। - गिरिजेश त्यागी, अपर जिलाधिकारी
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