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फीस से लेकर स्कूल ड्रेस तक में अभिभावकों को पड़ेगी आर्थिक मार

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अंबेडकरनगर। बच्चों बेहतर शिक्षा व सुविधाएं देने के नाम पर नए शिक्षासत्र में अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ने जा रहा है। निजी विद्यालयों में न सिर्फ 10 प्रतिशत फीस की वृद्धि की जा रही है, बल्कि ड्रेस व कापी किताब के दाम में भी 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सपना संजोए अभिभावकों के लिए अप्रैल माह काफी भारी पड़ने वाला है।
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आगामी 1 अप्रैल से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होने जा रहा है। इसे लेकर विद्यालयों में तैयारियां भी तेज हो गई हैं। ज्यादातर विद्यालयों में प्रवेश भी प्रारंभ हो गया है। शासन की गाइडलाइन को दरकिनार कर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों द्वारा प्रवेश के नाम पर पूरी तरह मनमानी की जा रही है। बेहतर शिक्षा देने, ट्रांसपोर्ट, एग्जाम, कम्प्यूटर समेत अन्य प्रकार की फीस की रसीद अभिभावकों को थमा दी जा रही है। इतना ही नहीं लगभग सभी विद्यालयों द्वारा निर्धारित दुकानों से ही कॉपी किताब लेने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जाता है। इसका मुख्य कारण दुकानदार द्वारा उन्हें अच्छा कमीशन दिया जाना है। बताते चलें कि शहरी क्षेत्रों में लगभग 175 मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। हिंदी मीडियम से संचालित विद्यालयों में कक्षा 1 से कक्षा 10 तक औसतन फीस 200 रुपये से साढ़े तीन सौ रुपये है, जबकि इंग्लिश मीडियम विद्यालयों में कक्षा 1 से कक्षा 10 तक साढ़े 400 से लेकर 1200 रुपये प्रति माह फीस है। और तो और नर्सरी कक्षाओं की भी फीस हिंदी मीडियम में 200 से 300 रुपये प्रति माह, जबकि इंग्लिश मीडियम में साढ़े 300 से 500 रुपये प्रतिमाह है। विगत वर्ष के सापेक्ष इस वर्ष फीस में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है।

खास दुकानों से मिल रही किताबें
निजी विद्यालयों की मनमानी का आलम यह कि प्रत्येक विद्यालय की अलग अलग किताबें हैं। यह किताबें सभी दुकानों पर मिलती भी नहीं हैं। प्रत्येक विद्यालयों की एक निर्धारित दुकान होती है, जहां सिर्फ उन्हीं की किताबें मिलती हैं। ऐसे में संबंधित विद्यालय प्रवेश कराने पहुंचे अभिभावकों को पुस्तकों की लिस्ट थमा दी जाती है और उन्हें निर्धारित दुकान से ही पुस्तक लेने के लिए मजबूर किया जाता है। अलग अलग पब्लीकेशन की किताब होने के चलते यह काफी महंगी होती हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ नर्सरी कक्षा की पुस्तकें ही 500 रुपये से 1 हजार रुपये तक की होती हैं। इतना ही नहीं किताब के साथ साथ कापी भी लेने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जाता है। अकबरपुर के प्रसिद्ध व्यवसाई जोगिंदर मिश्र ने कहा कि किताबों के दाम में विगत वर्ष के सापेक्ष 5 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। हिंदी मीडिएम की किताबों के दाम में 5 से 7 प्रतिशत, जबकि अंग्रेजी माध्यम की किताबों के दाम में 8 से 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
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स्कूल से ही बेचा जा रहा ड्रेस
जिस प्रकार से कॉपी किताब के लिए दुकानें निर्धारित हैं, उसी प्रकार से ड्रेस के लिए भी दुकानें विद्यालयों द्वारा निर्धारित की गई हैं। वैसे तो ज्यादातर विद्यालयों के ड्रेस एक निर्धारित दुकान पर ही मिलती हैं, लेकिन कुछ विद्यालय ऐसे हैं, जो स्कूल परिसर से ही न सिर्फ कापी किताबें, बल्कि ड्रेस की भी बिक्री करते हैं। इसके लिए वे अभिभावकों से मनमानी रकम की वसूली करते हैं। ड्रेस विक्रेता नवीन अग्रहरि ने कहा कि उनकी दुकान से आधा दर्जन विद्यालयों के ड्रेस की बिक्री की जाती है। ड्रेस के साथ साथ टाई व बेल्ट की भी बिक्री की जाती है।

विद्यालयों की मनमानी पर लगे रोक
अकबरपुर के अभिभावक शहाब परवेज व दीप कुमार ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालयों द्वारा बरती जा रही मनमानी पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। शासन की गाइडलाइन से हटकर कार्य करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। अभिभावक सुरेंद्र श्रीवास्तव व नीरज ने कहा कि निजी विद्यालयों द्वारा बेहतर शिक्षा के नाम पर न सिर्फ मनमाने ढंग से फीस ली जाती है, बल्कि महंगे दर पर कापी किताब व टाई बेल्ट भी दी जाती है। कहा कि नए शिक्षा सत्र पर अभिभावकों पर अधिक आर्थिक बोझ न हो, इसे लेकर प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए।

शासन की गाइडलाइन का शत-प्रतिशत पालन हो सके, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फीस, कापी किताब, ड्रेस के नाम पर अधिक वसूली की शिकायत यदि सामने आती है, तो जांच कर संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मनमानी फीस वसूली पर अंकुश पाने के लिए अलग-अलग टीम का गठन किया जा रहा है, जो नए शिक्षा सत्र पर विद्यालयों में पहुंचकर जांच करेगी। -विनोद सिंह, डीआईओएस
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