अंबेडकरनगर। जिले में टीबी रोग के मरीजों की संख्या वर्ष प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है। असल में इस घातक बीमारी से बचाव को लेकर लोगों में जागरूकता लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जाती है। इसी का नतीजा है कि जिले में वर्ष 2005 से अब तक जिला अस्पताल में 23 हजार 869 मरीज पंजीकृत हुए हैं। वर्ष 2017 से अब तक टीबी के 107 मरीज सामने आए। इलाज के दौरान 10 मरीजों की मौत हो गई।
शनिवार 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस है। जिले के स्वास्थ्य विभाग में इसे लेकर एक दिन पहले शुक्रवार को किसी प्रकार की तैयारी नहीं दिखी। टीबी जैसी घातक बीमारी के प्रति स्वास्थ्य विभाग कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लंबे समय से इसे लेकर कोई प्रत्यक्ष जागरुकता अभियान नहीं चल सका है। अभियान के नाम पर महज औपचरिकता ही निभाई गई है। परिणाम यह है कि जिले में टीबी के मरीजों की संख्या वर्ष दर वर्ष बढ़ती ही जा रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2005 से अब तक कुल 23 हजार 869 मरीज जांच में टीबी से ग्रसित पाए गए। इसके सापेक्ष विभाग ने 21 हजार 794 को रोगमुक्त किए जाने का दावा किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से अब तक कुल 1531 टेस्ट हुए। इसमें 107 में टीबी के लक्षण पाए गए। 79 मरीजों की हालत गंभीर है, जबकि 16 को रेफर कर दिया गया है। 10 मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि 2 मरीज बीच में ही जिला अस्पताल का इलाज छोड़कर चले गए।
जिला अस्पताल व सीएचसी जलालपुर में ही जांच की व्यवस्था
टीबी रोगियों के बलगम की जांच के लिए जिला अस्पताल व सीएचसी जलालपुर में सीवीएनएटी मशीन स्थापित है। इन दोनों अस्पतालों मचें न सिर्फ बलगम की जांच होती है, बल्कि इलाज की भी समुचित व्यवस्था है। सीएमओ डॉ. कृष्णगोपाल सिंह ने बताया कि दोनों अस्पताल में बलगम की जांच अत्याधुनिक मशीनों द्वारा की जाती है। जांच रिपोर्ट तीन घंटे में मरीजों को उपलब्ध करा दी जाती है।
मरीजों को मिल रहा डीबीटी योजना का लाभ
टीबीमुक्त समाज की स्थापना के लिए केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इसमें मुफ्त जांच व इलाज के साथ ही इलाज के लिए आने जाने के लिए मरीज को ढाई सौ रुपये किराया व 500 रुपये भोजन के लिए डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर योजना के माध्यम से दिया जाता है। योजना के तहत जिले के 98 मरीजों को साढ़े सात सौ रुपये मिल रहे हैं।
टीबी के लक्षण
वरिष्ठ चिकित्सक डा. विजय तिवारी ने बताया कि यदि किसी भी व्यक्ति को एक सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आती हो, लगातार हल्का बुखार रहता हो, शरीर का वजन घटता हो, सीने दर्द होता हो, बलगम के साथ खून आता हो, तो यह लक्षण टीबी के हैं। ऐसे में संबंधित मरीज को तत्काल जांच कराया जाना चाहिए। यदि जांच में टीबी के लक्षण पाए जाएं, तो विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराएं। टीबी रोग लाइलाज नहीं है। इसका इलाज संभव है।
यह सावधानी बरतें मरीज
वरिष्ठ चिकित्सक डा. मुकुल त्रिपाठी ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है। यह रोग हवा, मक्खी, मच्छर आदि से फैलता है। ऐसे में टीबी से ग्रसित मरीजों को बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। खांसते समय मुंह पर कपड़ा आवश्य रखें। बलगम पर मिट्टी डाल दें, जिससे उस पर मक्खी न बैठने पाए। यात्रा करने के दौरान मुंह पर मास्क लगाकर चले हैं। मरीज के खाने के बर्तन व बिस्तर साफ रखें। उसका तौलिया भी अलग रखें।