अंबेडकरनगर। जिले में प्रयोग के तौर पर स्प्रिंकलर से खेतों की सिंचाई के लिए भीटी विकास खंड का चयन हुआ है। भीटी ब्लॉक प्रदेश के 248 अतिदोहित क्रिटिकल जोन में से एक है। योजना के तहत फिलहाल 15 किसानों को सब्सिडी देकर इस विधि से उपकरणों की स्थापना कराई जाएगी। इस बीच जिला कृषि अधिकारी ने अपर निदेशक को पत्र भेजकर कहा है कि प्रथम चरण में ही 25 और किसानों को इस योजना से जोड़ा जाए। विभाग का मानना है कि इस विधि से सिंचाई में पानी की लगभग 60 प्रतिशत बचत सुनिश्चित हो सकेगी।
गौरतलब है कि पानी की उपलब्धता व जलस्तर का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इसे देखते हुए ही कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें पानी का अधिकाधिक दोहन रोकने के साथ ही पानी की बर्बादी पर अंकुश लगाने के प्रयास भी शामिल हैं। इस बीच भूजलस्तर की बिगड़ती हुई स्थिति सुधारने के लिए राज्य सरकार ने स्प्रिंकलर विधि से खेतों की सिंचाई को बढ़ावा देने का फैसला किया है। मूल रूप से बुंदेलखंड में ही लागू इस योजना का अब प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में विस्तार किया जा रहा है। सरकार ने बीते दिनों तय किया कि बुंदेलखंड से इतर प्रदेश के जो 248 संकटग्रस्त ब्लॉक हैं, उनमें किसानों को स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई के लिए प्रेरित किया जाए। लागत अधिक होने के कारण किसानों के बीच यह विधि यूपी में ज्यादा लोकप्रिय नहीं रही है। इसीलिए सरकार ने केंद्रांश व राज्यांश के तौर पर अनुदान देने का फैसला भी किया है।
योजना के तहत पहले से ही अति क्रिटिकल जोन में शामिल भीटी विकास खंड को चुना गया है। प्रदेश के संकटग्रस्त 248 ब्लॉकों में भीटी भी शामिल है, जहां प्रयोग के तौर पर स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई शुरू कराई जाएगी। योजना के तहत 15 किसानों को फिलहाल इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके लिए विभाग ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
उधर, विभाग ने अपर निदेशक कृषि लखनऊ को पत्र भेजकर कहा है कि योजना का सम्यक लाभ दिखाया जा सके, इसलिए 25 अन्य किसानों को प्रथम चरण में ही योजना के तहत शामिल किया जाए। इससे स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई के बाद आने वाले फायदे ज्यादा व्यापक रूप से अन्य किसानों को समझाए व बताए जा सकेंगे।
इस तरह मिलेगा अनुदान
लघु सीमांत, महिला व अनुसूचित जाति के कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान एवं अन्य किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। सामान्य वर्ग के किसानों को 56 हजार रुपये अनुदान मिलेगा जबकि अन्य वर्ग के किसानों को 63 हजार का अनुदान दिया जाएगा। एक हेक्टेअर क्षेत्रफल में सिंचाई के लिए कुल 70 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इसमें 320 फीट पाइप जबकि एक डीजल पंप की भी स्थापना होगी। बोरिंग किसान के पास पहले से होनी चाहिए। अन्य व्यवस्था योजना के तहत उपलब्ध कराई जाएगी।
इन्हें मिलेगा लाभ
जिन किसानों को योजना के तहत लाभ मिलेगा, उनमें लालकुंवर तिवारी, सुनील कुमार, नरेश पांडेय, विनय वर्मा, सौरभ यादव, मस्तराम, अभिषेक सिंह, उमेश सिंह, अमरेश यादव, पवन तिवारी व अनिल कुमार आदि शामिल हैं।
फव्वारे के जरिये होती है सिंचाई
पानी पंप या ओवरहेड टैंक से पाइप द्वारा मशीन तक पहुंचता है। एक हेक्टेअर खेत में चार मशीनें लगाई जाती हैं। मशीन चारों तरफ घूमकर फव्वारे के रूप में सिंचाई करती है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. धर्मराज सिंह ने बताया कि यदि मशीन को पंप से जोड़ा जाए तो दो नाजिल के बीच की दूरी 30 मीटर और यदि ओवरहेड टैंक से जोड़ा जाए तो दो मशीन के बीच की दूरी 25 मीटर तक रखी जाती है।
प्रभावी रहेगी स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई
प्रदेश के 248 संकटग्रस्त ब्लॉकों में से एक भीटी का चयन स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई के लिए किया गया है। इससे निश्चित तौर पर जिले के किसानों में एक नया संदेश जाएगा। मॉडल के तौर पर फिलहाल 15 किसानों का चयन हुआ ह, जबकि 25 अन्य के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। किसानों को सिंचाई की यह विधि पसंद आई तो आगे पेयजल बर्बादी रोकने व कम पानी में ज्यादा सिंचाई करने की योजना साकार हो सकेगी। -विनोद कुमार, उपकृषि निदेशक