गांवों में घुसा पानी, माझा उलटहवा का अन्य क्षेत्रों से संपर्क टूटा
टांडा। सरयू नदी का जलस्तर कई दिन बाद रविवार को अचानक तेजी से बढ़ा। दोपहर बाद तक पानी खतरे का निशान पार कर गया। इससे निकटवर्ती माझा क्षेत्र के लोगों में हड़कंप मच गया। माझा उलटहवा की तरफ जाने वाला रास्ता जलमगभन हो गया। गांव का संपर्क अन्य गावों से कट गया। इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक गांव चारों नदी के पानी से घिर गए हैं। आधा सेंमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए सोमवार सुबह तक निकटवर्ती गांव में पानी घुसने की आशंका बढ़ गई है।
करीब एक पखवारे पूर्व सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान के नीचे स्थिर था। शनिवार को एक बार फिर जलस्तर में वृद्धि होने लगी थी। शाम तक पानी खतरे के लाल निशान 92.730 मीटर से चार सेमी नीचे तक पहुंच गया था। इसके बाद जलस्तर में कमी दर्ज की गई लेकिन निकटवर्ती माझा क्षेत्र के लोगों के साथ प्रशासन ने भी राहत की सांस ली थी। लेकिन रविवार सुबह फिर जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। रविवार की शाम होते-होते नदी का पानी खतरे के लाल निशान से 20 सेमी ऊपर 92.750 मीटर पर पहुंच गया। अचानक हुई वृद्धि से नदी का पानी निकटवर्ती गांव माझा करमपुर, महरीपुर, आसोपुर, माझा छज्जापुर, चिंतौरा, मुबारकपुर, फूलपुर, बेलदहा, केवटला, पल्टूपीर, माझा इस्माईलपुर, माझा उलटहवा के निकट पहुंच गया।
नजदीक का माझा उलटहवा गांव बाढ़ के पानी से घिर गया। इस गांव को अन्य क्षेत्रों से जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता जलमगभन हो गया। इससे ग्रामीणों का अन्य क्षेत्रों से संपर्क टूट गया। इससे ग्रामीण परेशान हैं। उन्हें पानी और बढ़ने को लेकर चिंता सता रही है। माझा क्षेत्र के अन्य गावों के ग्रामीणों ने बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पशुओं के चारे की व्यवस्था करते हुए सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी शुरू कर दी। दरअसल जलस्तर में जिस तरह आधा सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से वृद्धि हो रही है उसे देखते हुए सोमवार सुबह तक निकटवर्ती गावों के अंदर पानी पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। इन हालात में प्रशासन भी सतर्क हो गया है। बाढ़ प्रखण्ड के अवर अभियंता प्रदीप कुमार ने बताया कि आधा सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। इलाके पर नजर रखी जा रही है।
सक्रिय की गई चौकियां
खतरे का लाल निशान पार करने को देखते हुए प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है। बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए जिन 34 निजी नावों को अधिग्रहीत किया गया है, उन्हें मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है। नाव मालिकों से कहा गया है कि वे पूरी तरह नाव के निकट ही तैयार रहें। किसी भी समय उन्हें नदी में उतारा जा सकता है। इसके अलावा जिन 32 बाढ़ चौकियों की स्थापना की गई है, उसे भी सक्रिय किया गया है। बाढ़ से निपटने को लेकर जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती की गई है, उन्हें अपने अपने क्षेत्र में मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है।
दिए गए हैं आवश्यक दिशा निर्देश
बाढ़ से निपटने के लिए जिन अधिकारियों व कर्मचारियों को लगाया गया है, उन्हें अपने अपने क्षेत्रों में मुस्तैद रहने को कहा गया है। अधिग्रहीत निजी नावों को तैयार रहने व बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। अभी स्थित नियंत्रण में है। प्रशासन लगातार बाढ़ पर नजर बनाए हुए है।
गिरिजेश त्यागी एडीएम