गर्मी का प्रकोप अभी बढ़ा नहीं लेकिन जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था जवाब देने लगी है। ओवरलोड चल रहे ट्रांसफार्मरों का फुंकना शुरू हो गया है। 56 दिन में अब तक डेढ़ सौ से अधिक विभिन्न क्षमता के ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। नतीजतन, संबंधित उपभोक्ताओं को अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर होना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर तारों का भी टूटना प्रारंभ हो गया है। इससे भी सुचारु विद्युत आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है। ऐसे में आगामी दिनों में जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ने वाली है।
विद्युत उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली उपलब्ध कराने को लेकर पावर कॉर्पोरेशन बढ़-चढ़कर दावे एवं वादे तो कर रहा है लेकिन उसे पूरा करने की सुध नहीं है। प्रत्येक वर्ष गर्मी बढ़ने से पूर्व जर्जर हो चुके उपकरणों को बदले जाने एवं ओवरलोडेड चल रहे ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने की मांग की जाती रही है लेकिन इस तरफ कभी गंभीरतापूर्वक ध्यान नहीं दिया जा सका।
सुचारु आपूर्ति को लेकर पावर कॉर्पोरेशन कितना गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी गर्मी का प्रकोप बढ़ा भी नहीं कि जर्जर एवं ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों ने जवाब देना शुरू कर दिया है, जो कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ने का साफ संकेत है।
फरवरी से अब तक जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में डेढ़ सौ से अधिक विभिन्न क्षमताओं के ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। फरवरी में 116 ट्रांसफार्मर फुंके जिनमें 10 केवीए के 14, 25 केवीए के 70, 63 केवीए के 26, 100 केवीए के दो व 250 केवीए के चार ट्रांसफार्मर शामिल हैं।
इसके अलावा 20 मार्च तक कुल 38 ट्रांसफार्मर जिनमें 10 केवीए के पांच, 16 केवीए का एक, 25 केवीए के 22, 63 केवीए के सात, 160 केवीए का एक, 250 केवीए के दो शामिल हैं। वैसे तो पावर कारपोरेशन इनमें से ज्यादातर के बदले जाने का दावा कर रहा है लेकिन हकीकत इससे परे है।