जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए बच्चों की जांच प्रक्रिया शुक्रवार को भी जिला अस्पताल में चली। 20 कुपोषित बच्चों की जांच में 15 बच्चे अति कुपोषित पाए गए। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उधर, कई तीमारदारों ने नाराजगी जताते हुए बताया कि अति कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती तो कर लिया जा रहा है लेकिन उनका समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। गौरतलब है कि जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए शासन स्तर से तमाम योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।
लेकिन उसे जमीनी हकीकत देने या फिर योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने को लेकर विभाग तनिक भी गंभीर नहीं है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुपोषित बच्चों की संख्या कम होने की बजाए बढ़ती जा रही है। अप्रैल में कुपोषित बच्चों की संख्या 66 हजार 669 थी जबकि मई में यह संख्या बढ़कर 66 हजार 679 हो गई।
इसे अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने कुपोषित बच्चों की जांच कराकर अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराने का अभियान शुरू किया है।
शुक्रवार को डीपीओ दुर्गेश प्रताप सिंह, सीडीपीओ गीतांजलि व सुधा तिवारी ने 20 कुपोषित बच्चों की जांच जिला अस्पताल में कराई। इनमें 15 अतिकुपोषित पाए गए। इनमें चंद्रकला, दीपांजलि, अमन, हर्षिका, अतुल, महिमा, सौम्या, अंकित, रिंका, फातिमा, जोया, सोनाक्षी, अक्सा, दीपांजलि व लकी शामिल हैं। इन सभी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जिला अस्पताल में पहले से भर्ती एक अतिकुपोषित बच्चे सदनपुर के शहजादे के पिता नन्हें खां ने कहा कि अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती तो कर लिया जाता है लेकिन उनका समुचित इलाज नहीं किया जाता।
सदरपुर के हर्षित के पिता संजय, सैदापुर की मिलानी के पिता काशिम व कुर्कीदाउदपुर की कार्तिकी के पिता महेंद्र ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इलाज के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जाती है। न तो ठीक से इलाज हो रहा है और न ही पौष्टिक आहार दिए जा रहे हैं।
सीएमएस डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में भर्ती अतिकुपोषित बच्चों के लिए अलग से वार्ड बना है, जहां उनका समुचित इलाज किया जा रहा है।