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72 घंटे से बिजली से वंचित है लगभग 45 हजार की आबादी

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72 घंटे से 45 हजार आबादी को नहीं मिल रही बिजली
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क्षतिग्रस्त खंभों व जर्जर तार टूटने से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। खंभों के क्षतिग्रस्त होने व जर्जर हो चुके तारों के टूटने तथा ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों के फुंकने के चलते जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 45 हजार से अधिक आबादी लगभग 72 घंटे से विद्युत आपूर्ति से वंचित है। इससे लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा मुश्किल पेयजल के अलावा विद्युत चालित लघु-उद्योगों के संचालन को लेकर हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षतिग्रस्त विद्युत उपकरणों को अविलंब ठीक कराकर बिजली की सुचारु आपूर्ति कराई जाए।
गौरतलब है कि गत दिवस तेज हवा के साथ हुई बारिश के बाद अकबरपुर नगर समेत जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति ठप हो गई थी। कहीं जर्जर तार टूटने से आपूर्ति बाधित हुई तो कहीं खंभा क्षतिग्रस्त होने से। कई जगह ट्रांसफार्मर फुंकने से भी आपूर्ति बाधित हुई थी। अकबरपुर नगर समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में तो धीरे-धीरे गड़बड़ियों को दूर आपूर्ति बहाल कर दी गई लेकिन भीटी, महरुआ, जलालपुर, आलापुर व टांडा आदि क्षेत्रों के तमाम गांव ऐसे हैं जहां आपूर्ति बहाल तो कर दी गई लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था के द्वारा। नतीजतन आए दिन आपूर्ति बाधित होती रहती है। इसी का नतीजा है कि बीते 72 घंटे से जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 45 हजार आबादी को बिजली नहीं मिल सकी है।
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भीटी तहसील क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत खींचा गया तार तीन दिन पहले टूटकर गिर पड़ा। इससे लगभग 12 हजार आबादी को अब तक बिजली नहीं मिल सकी है। जलालपुर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के मालीपुर, सम्मनपुर व जैतपुर क्षेत्र में लगभग एक दर्जन गांवों में विद्युत खंभा क्षतिग्रस्त होने से लगभग 20 हजार आबादी को अंधेरे में ही रात गुजारने को मजबूर होना पड़ रहा है। आलापुर प्रतिनिधि के अनुसार जहांगीरगंज, राजेसुल्तानपुर व रामनगर क्षेत्र में अलग-अलग क्षमता के चार ट्रांसफार्मर फुंकने से लगभग 14 हजार आबादी को बिना बिजली के ही काम चलाना पड़ रहा है। बदतर विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के चलते एक तरफ जहां संबंधित क्षेत्र में तमाम उपभोक्ताओं को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है, वहीं विद्युत चालित लघुउद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं।
सुचारु बिजली तब तक नहीं उपलब्ध कराई जा सकती, जब तक जर्जर हो चुके उपकरणों को बदला नहीं जाता। वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलने वाला नहीं है। सुचारु बिजली उपलब्ध कराने को लेकर अधिकारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आंधी आए लगभग एक माह होने को है लेकिन क्षतिग्रस्त उपकरणों को नहीं दुरुस्त किया जा सका है।
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पावर कॉर्पोरेशन के अधिशाषी अभियंता मुकेश बाबू ने बताया कि उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली उपलब्ध कराने को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यदि कहीं से गड़बड़ी की जानकारी मिलती है तो उसे तत्काल ठीक कराकर बिजली उपलब्ध कराई जाती है।
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