दूसरे चरण में बिजली से रोशन होंगे 2667 मजरे
हैदराबाद की कार्यदायी संस्था ने शुरू किया काम
शुरुआती दौर में ही सामने आ रही मनमानी
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। पहले चरण में 2240 मजरों के विद्युतीकरण के बाद अब 2667 मजरों का विद्युतीकरण कराया जाएगा। पहले चरण में मनमानी व धांधली करने वाली एक निजी कार्यदायी संस्था पर बीते दिनों ही अहिरौली थाने में केस दर्ज कराया जा चुका है। दूसरे चरण का कार्य एक अन्य संस्था नागार्जुन कांस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी ने कार्य शुरू भी कर दिया है। हालांकि शुरुआती दौर में ही इस कंपनी पर भी मनमानी बरतने के आरोप लगने लगे हैं।
गौरतलब है कि पहले शुरू हुई राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत मजरों के विद्युतीकरण के लिए पूर्व में हरियाणा की कार्यदायी संस्था आईएलएफएस को नामित किया गया था। पहले चरण में सभी पांच तहसीलों के 2240 मजरों के विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा गया था। कार्य पूरा करने के बाद कंपनी के ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी वापस लौट गए। मई में आई तेज आंधी के साथ हुई बारिश के चलते कई स्थानों पर विद्युत खंभे क्षतिग्रस्त हो गए और तार टूट गए। इन्हें ठीक कराने की सुध कंपनी ने नहीं ली। इस पर गत दिवस ही संबंधित कंपनी के अध्यक्ष के विरुद्ध अहिरौली थाने में केस दर्ज कराया गया था।
इस बीच बीते दिनों दूसरे चरण में जिले के दो हजार 667 मजरों को चुना गया, जहां अभी तक रोशनी नहीं पहुंच सकी थी। ऐसे गांवों में विद्युतीकरण के लिए हैदराबाद की नागार्जुन कांस्ट्रक्शन कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। संस्था ने विद्युतीकरण का कार्य शुुरू कर दिया है। सभी संबंधित गांवों में विद्युतीकरण का कार्य पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2018 रखा गया है। इससे लगभग छह लाख की आबादी को लाभ मिलना तय है। लंबे समय से इन 2267 मजरों के बाशिंदों द्वारा विद्युतीकरण की मांग चली आ रही थी। ग्रामीणों के मुताबिक बिजली न मिलने से उन्हें खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। निजी संस्था द्वारा विद्युतीकरण का कार्य शुुरू कराए जाने के साथ ही मनमानी का भी मामला सामने आने लगा है। आरोप है कि जल्द विद्युतीकरण कराने का लालच देकर सामग्री एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने व विद्युत खंभा लगाने के लिए गड्ढों की खोदाई अक्सर संबंधित गांव के ग्रामीणों से ही करा ले रहे हैं।
प्रोजेक्ट मैनेजर एनके परवारी ने बताया कि 2667 मजरों का 66 करोड़ की लागत से विद्युतीकरण का कार्य अप्रैल 2018 पूर्ण करने का लक्ष्य है। इसे समय रहते पूर्ण कर लिया जाएगा। विद्युतीकरण कार्य नियमानुसार ही कराया जा रहा है। कई जगह ग्रामीण खुद ही मौके पर मौजूद रहते हैं। उनसे कोई काम नहीं लिया जाता।
ग्रामीणों से कराया जाता है कार्य
बरामदपुर जरियारी गांव के जयप्रकाश व हरखू ने कहा कि विद्युतीकरण के नाम पर ग्रामीणों से ही सामग्रियों की ढुलाई कराई जाती है। इतना ही नहीं खंभे लगाने के लिए गड्ढे की भी खोदाई अक्सर ग्रामीणों से कराई जाती है। दुल्लापुर के जयप्रकाश व अनिल ने कहा कि यदि ग्रामीण सामान की ढुलाई या फिर गड्ढा खोदने से इंकार करते हैं, तो उस गांव में कार्य लटका दिया जाता है। इसकी शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। नतीजतन इसका प्रतिकूल प्रभाव विद्युतीकरण पर पड़ रहा है। अखईपुर के घनश्याम व सुनील कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कंपनी द्वारा विद्युतीकरण के नाम पर लापरवाही बरती जा रही है। ज्यादातर कार्य ग्रामीणों से कराया जाता है। इस पर अंकुश लगाए जाने की जरूरत है।