चिकनगुनिया की जांच व इलाज की सुविधा ही नहीं
मरीजों को जाना पड़ता है जिले के बाहर
डेंगू की जांच सिर्फ जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज में
पिछले वर्ष हुई थी सात लोगों की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। जिले में चिकनगुनिया की जांच व इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज में डेंगू की जांच की व्यवस्था तो है लेकिन इलाज का मुकम्मल इंतजाम न होने के चलते मरीज को लखनऊ या फिर अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। पिछले वर्ष डेंगू की चपेट में आने से 7 लोगों की मौत हो गई थी। मौजूदा समय में जिले में डेंगू से निपटने को लेकर पूरी तरह लापरवाही का माहौल पसरा हुआ है। जिला अस्पताल में तो डेंगू से निपटने के लिए वार्ड की स्थापना ही अब तक नहीं की जा सकी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में वार्ड की स्थापना तो की गई है लेकिन उसमें ज्यादातर समय ताला ही बंद रहता है।
आगामी दिनों में डेंगू व चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारी की आशंका बढ़ने के बावजूद इससे निपटने को लेकर जिले में स्वास्थ्य विभाग अभी सक्रिय नहीं हो पाया है। डेंगू की जांच तो जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में उपलब्ध है लेकिन इसके इलाज की किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है। नतीजतन जिला अस्पताल या फिर राजकीय मेडिकल कॉलेज आने वाले डेंगू व चिकनगुनिया के मरीजों को प्रारंभिक इलाज के बाद लखनऊ या फिर अन्य बड़े अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। पिछले वर्ष जिला अस्पताल में 60 से अधिक जबकि राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में 350 से अधिक डेंगू के लक्षण वाले मरीज पहुंचे। इनमें से ज्यादातर को लखनऊ रेफर कर दिया गया। पिछले वर्ष टांडा, जलालपुर व भीटी तहसील क्षेत्र में 7 लोगों की डेंगू की चपेट में आने से मौत हुई थी जिसे लेकर खूब हंगामा भी हुआ था। अब जबकि डेंगू व चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारी का मौसम एक बार फिर आ गया है तब भी इससे निपटने के लिए कोई ठोस कदम स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं उठाया जा सका है।
डेंगू व चिकनगुनिया से निपटने को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में डेंगू से निपटने के लिए अब तक वार्ड की ही स्थापना नहीं की जा सकी है।। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में वार्ड तो है लेकिन उसमें लंबे समय से ताला लटका हुआ है।
सीएमएस डॉ. केएस पांडेय ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की समुचित व्यवस्था है। इलाज की व्यवस्था नहीं है। चिकनगुनिया की जांच की व्यवस्था नहीं है। इसके शुरुआती लक्षण के मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में होता है।