यह देख वहां मौजूद चौकीदार ने गुहार लगा दी। इस पर आसपास मौजूद लोग पांच अलग-अलग नावों को लेकर पीपे में मौजूद लोगों को बचाने के लिए निकल पड़े। 15 किमी दूर आगे जाकर सभी 22 पीपे गोरखपुर के गाय घाट के निकट रुक मिल गए। वहां सभी दस लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
मालूम हो कि आलापुर तहसील क्षेत्र के कम्हरिया घाट में सरयू नदी पर पीपे का पुल बना है। गोरखपुर तक आने जाने के लिए अंबेडकरनगर के आलापुर तहसील क्षेत्र के लोग इसी पुल का इस्तेमाल करते हैं। आजमगढ़ व जौनपुर जनपद के कुछ हिस्सों के लोग भी इसी पुल से होकर आवागमन करते हैं। यहां कुल 71 पपों से बना हुआ है।
यह प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर से 15 जून तक ही बना रहता है। इसके बाद पीपे हटा लिए जाते हैं। कारण यह कि 15 जून के बाद अक्सर पानी का दबाव तेजी से बढने लगता है। इस बार नदी से पीपे का पुल हटाने में कुछ विलंब हो गया। पानी का दबाव भी तेजी से बढ़ा। पिछले चार दिनों से सरयू नदी के इस पीपे के पुल को खोले जाने का काम चल रहा था। 11 पीपे नदी के उस पार गोरखपुर जनपद की सीमा में लगाए जा चुके थे।
38 पीपे कम्हरिया घाट पुल पर लगे हैं। शेष 22 पीपों को सोमवार को खोले जाने का काम चल रहा था। इसमें एक चौकीदार राजकुमार समेत कुल 10 लोग लगे हुए थे। पीपे से बंधे रहने वाले रस्सों को काटने की प्रक्रिया के दौरान असावधानी के चलते रस्सा कटते ही सभी 22 पीपे अचानक एक साथ नदी की धारा में बहने लगे।
पीपे पर मौजूद चौकीदार समेत अन्य श्रमिक भी उसके साथ बहते हुए आगे जाने लगे। यह देख कम्हरिया घाट पर मौजूद एक दूसरे चौकीदार लालधर ने गुहार लगा दी। यह सुन आसपास के लोग एकत्र हो गए। आननफानन वे सब पांच अलग अलग नाव लेकर सभी लोगों को बचाने निकल पड़े। पीपे तेजी से आगे बहते जा रहे थे।
बाद में सभी पीपे गोरखपुर जनपद के गाय घाट के किनारे लगे पाए गए। लगभग 15 किमी की दूरी तय कर नाव से पहुंचे लोगों ने सभी दस लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्हें सड़क मार्ग से अब वापस लाया जा रहा है। उधर घटना की सूचना मिलने के बाद राजेसुल्तानपुर एसओ चंद्रभान यादव ने मौके का जायजा लिया।