किसानों के हित को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकारें लंबे चौड़े दावे तो करती हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। किसानों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें इसके बारे में समुचित जानकारी देने के लिए शासन स्तर से न्याय पंचायतों में किसान सहायक की तैनाती की गई है।
किसान सहायकों का मुख्य कार्य किसानों को नई नई तकनीकी खेती के बारे में जानकारी देना है, जिससे कम खर्च कर अधिक लाभ किसान कमा सकें। शासन की यह योजना जिले में पूरी तरह लापरवाही की शिकार होकर रह गई है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में कुल 112 न्याय पंचायतें हैं। प्रत्येक न्याय पंचायत में एक एक किसान सहायक की तैनाती की जानी थी।
लापरवाही का आलम यह कि मात्र नौ न्याय पंचायतों में ही किसान सहायक की तैनाती की जा सकी है। शेष 109 पद लगभग दस वर्ष से रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में योजनाओं की समुचित जानकारी किसानों को नहीं हो पा रही है। उधर जिला कृषि अधिकारी सुभाष ने बताया कि रिक्त चल रहे पदों पर तैनाती को लेकर शासन को पत्र भेजा गया है।