अहम सबूत, केस डायरी में होगा शामिल
सूत्रों का कहना है कि कुर्की के दौरान बरामद वसूली की रसीद जैनब के खिलाफ एक अहम सबूत है। पुलिस इसे उमेश पाल हत्याकांड के केस डायरी में शामिल कर सकती है। दरअसल, इसके जरिये यह साबित करने की कोशिश की जाएगी कि वसूली से लेकर अशरफ के हर कदम की वह राजदार थी। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि वसूली का संचालन जैनब अपने भाई सद्दाम की मदद से करती थी। कारोबारियों/बिल्डरों तक जेल में बंद अशरफ का संदेश सद्दाम ही पहुंचाता था।
आईएस-227 में शामिल हो सकता है नाम
नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उक्त रसीद से साफ है कि जैनब अशरफ के वसूली गैंग को संचालित कर रही थी। ऐसे में आईएस-227 की नई सूची में उसका भी नाम शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बता दें कि पुलिस की ओर से 58 नए नामों के साथ ही आईएस-227 की नई सूची बनाई गई है। इसमें जो भी नाम शामिल हैं, वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से माफिया अतीक और अशरफ के मददगार रहे हैं। उनके खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
वसूली को लेकर ही शाइस्ता से थी अनबन
सूत्रों का कहना है कि अशरफ के जेल जाने के बाद ही शाइस्ता व जैनब में अनबन शुरू हुई। दरअसल, इससे पहले माफिया गैंग की अवैध कमाई का सारा हिसाब किताब खान शौलत हनीफ के जरिये शाइस्ता के पास रहता था। हालांकि, अशरफ के जेल जाने के बाद से शाइस्ता ने वसूली की कमान अपने हाथों में लेनी शुरू कर दी थी। इसकी भनक लगने के बाद ही शाइस्ता व उसके रिश्ते में खटास आ गई थी।