थाना क्षेत्र के छतनाग गांव स्थित नागेश्वर मंदिर गंगा घाट पर बुधवार की सुबह नहाते वक्त गहरे पानी में डूबने से एक युवक की मौत हो गई। हादसे में डूब रहे तीन अन्य युवकों को बचा लिया गया। चारों युवक एक साथ गंगा नहाने नागेश्वर गंगा घाट पर पहुंचे थे। युवक के मौत की खबर उसके घर पहुंची तो परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन बदहवास होकर रोने-बिलखने लगे। घटना से घाट के किनारे काफी देर तक अफरा-तफरी मची रही। सूचना पर इलाकाई पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी रही।
थाना क्षेत्र के नैका-महीन गांव निवासी 19 वर्षीय सचिन पुत्र महेश कुमार हनुमानगंज के बगई गांव स्थित इंटरमीडिएट कॉलेज में इंटर का छात्र था। वह चार भाईयों में सबसे छोटा था। पिता जल निगम में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। बुधवार की सुबह तकरीबन दस बजे सचिन अपने दोस्त हर्ष, बादल और वीरेंद्र के साथ झूंसी के छतनाग गांव स्थित नागेश्वर मंदिर के गंगा घाट पर नहाने गया था। कुंभ मेले के बजट से नागेश्वर मंदिर के पास पक्के घाट का निर्माण कराया गया है। चारों युवक गहरे पानी के कूदकर स्नान कर रहे थे।
तभी हर्ष और सचिन डूबने लगे। किसी तरह हर्ष को तो दोस्तों ने गहरे पानी में डूबने से बचा लिया लेकिन सचिन डूबने लगा। उसके साथियों ने शोर मचाया तो घाट के किनारे मौजूद ग्रामीण वहां पहुंचे तथा डूब रहे सचिन को बचाने के लिए गंगा में कूदे लेकिन सफलता नहीं मिली। तब तक सचिन गहरे पानी में पूरी तरह समा चुका था। वीरेंद्र को भी भारी मशक्कत के बाद बचा लिया गया था। घटना की जानकारी इलाकाई पुलिस को दी गई तो मौके पर पहुंची। बाद में गांव के कुछ मल्लाहों ने भारी मशक्कत के बाद सचिन के शव को गहरे पानी से बाहर निकाला। उधर, युवक के मौत की खबर उसके घर पहुंची तो कोहराम मच गया। परिजन रोने-बिलखने लगे। मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी रही।
तैरना नहीं जानता था सचिन, जुटी रही भारी भीड़
झूंसी। गंगा में डूबने से मौत के मुंह में असमय समाने वाला सचिन तैरना नहीं जानता था। ग्रामीणों ने बताया कि सचिन और वीरेंद्र ठीक से तैरना नहीं जानते थे। यही वजह रही कि जैसे ही दोनों गहरे पानी तक पहुंचे, डूबने लगे। किसी तरह वीरेंद्र को तो बचा लिया गया लेकिन सचिन गहरे पानी में समा गया। परिजन उसके शव से लिपटकर जार-जार रोए जा रहे थे। उन्हें क्या पता था कि गंगा नहाने गया सचिन बेजान बनकर घर लौटेगा। गंगा घाट और सचिन के घर पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी रही। हादसे में बचे वीरेंद्र, हर्ष और बादल भी देर शाम तक सहमे हुए थे।