कोर्ट ने आयुष और उसके पिता देवराज सिंह मलिक से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। आयुष ने बताया कि वह 31 साल का है। उसने वर्ष 2014 में बिना किसी डर, लालच, दबाव या जबरदस्ती के स्वेच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार किया था। तब से वह उसके रीति-रिवाजों का पालन कर रहा है। उसने यह भी कहा कि वह चांदनी कुरैशी से शादी करना चाहता है।
आयुष के पिता ने अदालत को बताया कि उनके बेटे को भटकाया गया है। उसकी भलाई को देखते हुए वह धर्म परिवर्तन और विवाह के फैसले के खिलाफ हैं। कोर्ट ने कहा कि बालिग के व्यक्तिगत फैसलों पर अभिभावकों की असहमति सांविधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकती। कोर्ट ने आयुष को अपनी इच्छा से रहने, अपने पसंद के धर्म का पालन करने और कानून के मुताबिक वैवाहिक संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र कर दिया।
यह है मामला
आयुष के पिता ने छह जून 2026 को पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि युवती ने उनके बेटे को प्रेम जाल में फंसाकर उसका जबरन धर्मांतरण कराया है। तहरीर पर पुलिस ने चांदनी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी और एक रिश्तेदार के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 और बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया था। 24 जुलाई को ट्रायल कोर्ट से आरोपियों को जमानत मिल गई थी।