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High Court : जिम्मेदारियों से बचने के लिए लिव इन रिलेशन की ओर आकर्षित हो रहे युवा, हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

Fri, 24 Jan 2025 04:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशन की कोई सामाजिक स्वीकृति नहीं है। फिर भी युवा ऐसे संबंधों की ओर आकर्षित होते हैं। क्योंकि पुरुष हो या महिला दोनों अपने साथी के प्रति अपने दायित्व से बचना चाहते हैं। इसलिए लिव इन रिलेशन के प्रति युवाओं का आकर्षण बढ़ रहा है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशन की कोई सामाजिक स्वीकृति नहीं है। फिर भी युवा ऐसे संबंधों की ओर आकर्षित होते हैं। क्योंकि पुरुष हो या महिला दोनों अपने साथी के प्रति अपने दायित्व से बचना चाहते हैं। इसलिए लिव इन रिलेशन के प्रति युवाओं का आकर्षण बढ़ रहा है। अब समय आ गया है कि हम सभी को इस पर विचार करना चाहिए और समाज में नैतिक मूल्यों को बचाने के लिए कोई रूपरेखा और समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए।

न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने पीड़िता के साथ शादी का झूठा झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में उससे शादी करने से इनकार करने के आरोप में दुष्कर्म व अन्य धाराओं के तहत दर्ज मुकदमे में जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। एफआईआर के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता का गर्भपात भी कराया, जाति-संबंधी टिप्पणियां कीं। उसके साथ मारपीट भी की।

मामले में जमानत की मांग करते हुए उसने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसमें उसके वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष की कहानी झूठी और मनगढ़ंत है, क्योंकि इस मामले की पीड़िता एक वयस्क महिला है। दोनों के बीच सभी संबंध सहमति से बने थे और उनके बीच शारीरिक संबंध कभी भी अभियोक्ता की सहमति या स्वतंत्र इच्छा के बिना नहीं बने या विकसित नहीं हुए।

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यह भी प्रस्तुत किया गया कि पीड़िता लगभग 6 वर्षों की अवधि के लिए आरोपी/अपीलकर्ता के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थी और गर्भपात का कथित तथ्य केवल बेबुनियाद आरोप था। यह भी प्रस्तुत किया गया कि आरोपी ने पीड़ित महिला से कभी भी शादी करने का वादा या आश्वासन नहीं दिया और वे आपसी सहमति से रिश्ते में थे। इस पृष्ठभूमि में समाज में नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए कुछ रूपरेखा और समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल देते हुए तथा यह देखते हुए कि अभियोक्ता एक वयस्क महिला है, जो आरोपी के साथ सहमति से संबंध में थी, पीठ ने आरोपी को जमानत दी।

अदालत ने टिप्पणी की

"मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तथा अपराध की प्रकृति, साक्ष्य, आरोपी की मिलीभगत, सजा की गंभीरता और यह भी ध्यान में रखते हुए कि अभियोक्ता एक वयस्क महिला है। दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे, अदालत की राय है कि अपीलकर्ता ने जमानत के लिए मामला बनाया।"

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