यह हैं 10 वर्ष की यशल फात्मा जो पिछले वर्ष 9 वर्ष की थीं तो इनकी रोजा कुशाई हुई थी। गर्ल्स हाई स्कूल में चौथी कक्षा मे पढ़ने वाली यशल इस वर्ष भी स्कूलों में छुट्टी होने पर पूरे रोजे रख रही हैं। सोशल वर्कर सै. मो. अस्करी की भतीजी यशल फात्मा बाकायदा सहरी मे उठ कर सहरी करती हैं और पांचों वक्त की नमाज भी पांच वर्ष की उम्र से बराबर मुसतैदी से पढ़ती हैं।
इनके वालिद अब्बास मेंहदी रिजवी शारजाह मे नौकरी करते हैं। मां शाहीन फात्मा और फूफी समीना रिजवी की लाडली होने के बाद भी नमाज और रोजा रखने में इनकी ख्वाहिश के आगे किसी की नहीं चलती। इस भीषण गर्मी में जहां बड़ों-बड़ों को रोजा रखने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है वहीं 10 वर्षीय यशल दूसरों के लिए मिसाल हैं।