गड़बड़ी पाए जाने पर करें सख्त कार्रवाई
स्वचालित आग बुझाने की व्यवस्था और यात्रियों के केबिन में आग पर काबू पाने के लिए उपयुक्त प्रणाली का भी प्रावधान होना चाहिए। चालक की नींद का पता लगाने वाली प्रणाली का उल्लेख भी मानकों में किया गया है। कोर्ट ने कहा यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों को चालक, परिचालक और बस के लाइसेंसधारक के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी होगी।
मुख्य सचिव ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वह मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे। बसों की संयुक्त जांच कराई जाएगी और रात में विशेष निरीक्षण किया जाएगा। हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को हलफनामा दाखिल कर पिछले तीन वर्षों में प्रदेश से स्लीपर बसों को जारी किए गए परमिटों की संख्या बताने का निर्देश दिया है। अन्य कई जानकारी भी कोर्ट ने मांगी है। अगली सुनवाई 13 अक्तूबर 2026 को होगी। उस दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।